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काव्य : ग़ज़ल - उमेन्द्र निराला, प्रयागराज

 
काव्य : 

ग़ज़ल

बेज़ुबान भी लफ़्ज़ बयाँ करने लगे,
कटघरे में झूठ को सच कहने लगे।

धर्म की आड़ में जो छिपे बैठे थे,
सच के सवालों से अब डरने लगे।

तख़्त पाया जिन्होंने झूठे वादों से,
विरोध देख बयान बदलने लगे।

सत्ता जब कटघरे में खड़ी हुई,
बचाव में अख़बार निकलने लगे।

कुछ भी नहीं जिनके पास, फिर भी
अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ने लगे।

नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत मिली,
लोग बदलाव की राह पर चलने लगे।

उमेन्द्र निराला, प्रयागराज
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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