2 वर्ष पश्चात आ रहेश्री अभिमन्यु 24 से 27 सितंबर तक सुखतवा आश्रम में मरीज का इलाज करेंगे
इटारसी। श्री अभिमन्यु जिनकेचेहरे पर ललाट, आंखों में तेज ,वाणी में विन्रमता उनके जीवन की खासियत है।श्री अभिमन्यु जी एक प्रख्यात आध्यात्मिक मार्गदर्शक एवं परा-विज्ञान चिकित्सक हैं, जिनके सान्निध्य में आधुनिक मनोविज्ञान और समृद्ध भारतीय दर्शन का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। उच्च शैक्षणिक योग्यता में क्लिनिकल साइकोलॉजी में डॉक्टरेट (Ph.D.) और दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर (M.A.) होने के कारण लोग उन्हें आदर से ‘डॉक्टर’ भी कहते हैं, किंतु अपनी निस्वार्थ सेवा-भाव, करुणा और सहज मार्गदर्शन के कारण वे समाज व अनुयायियों के बीच ‘श्री अभिमन्यु जी’ के नाम से जाने जाते हैं। पिछले कई दशकों से वे एक स्वस्थ व्यक्ति और संतुलित समाज के निर्माण हेतु निरंतर समर्पित हैं; उन्होंने भारत एवं यूरोप के अनगिनत लोगों को गंभीर शारीरिक कष्टों, मानसिक तनाव और व्यावहारिक संकटों से उबारकर जीवन को उत्सव की तरह जीने की नई राह दिखाई है। देश-विदेश में निःशुल्क चिकित्सा शिविरों और आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से निस्वार्थ जन-कल्याण करते हुए वे ऐसा दिव्य वातावरण रचते हैं जहाँ लोग जैसे हैं वैसे ही आते हैं, और अपने अंतर्मन का पूर्ण नवीनीकरण कर एक नई दिशा, रोगमुक्त तन व चिंतामुक्त मन लेकर लौटते हैं।। व्यक्ति का जीवन जब जबरदस्त पूरी तरह टूट जाता है उसे चारों ओर अंधकार ही दिखाई देता है ।सारी दवाई और इलाज करने के बाद भी उसे आराम नहीं मिल पाता जिसकी वह अपेक्षा करता है। उसके अलावा परिवार भी परेशान होता है ।रूपए पैसे के अलावा सामाजिक और मानसिक परेशानी भी होती है ।इन सबसे छुटकारा पाने के लिए परा विज्ञान माध्यम बना है। जो बात विज्ञान से परे हो और सभी चिकित्सक और अलग-अलग विधि कार्य नहीं कर सकते तब पुष्कर निवासी श्री अभिमन्यु याद आते हैं। ना तो किसी को गोली दवाई देते हैं आपकी एमआरआई रिपोर्ट हो सीटी स्कैन ,एक्स रे रिपोर्ट हो जो आपके पास पहले से मौजूद रहते हैं उन्हीं रिपोर्ट को देखते हैं ।फिर केवल टोर्च की रोशनी से इलाज करते हैं ।हजारों लोग श्री अभिमन्यु के इलाज से लाभान्वित हुए। लगभग दो वर्ष बाद 24 से 27 सितंबर श्री अभिमन्यु अपने आश्रम सुखतवा में रहेंगे। प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक सभी मरीजों को देखेंगे। कैसा ही रोग हो एक बार मरीज को श्री अभिमन्यु आश्रम जाना चाहिए क्योंकि उम्मीद पर ही दुनिया टिकी है और निश्चित ही मरीज को फायदा होता है।
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