सरोकार :
बैंक लोन: गरीब करें आत्महत्या और
करोड़पतियों का 22,000 करोड़ हो
माफ !
-डाॅ. चन्दर सोनाने , उज्जैन
हाल ही में नेशनल कंपनी लाॅ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा एस्सेल ग्रुप के पूर्व चेयरमेन सुभाष चन्द्रा की 22006.57 करोड़ रूपए की देनदारी को घटाकर मात्र 6.25 करोड़ रूपए कर दिया था। अर्थात उसकी देनदारी को 99.97 प्रतिशत कम करने का तोहफा उसे दे दिया गया था। मीडिया में विशेषकर सोशल मीडिया में इसका जमकर विरोध होने पर नेशनल कंपनी लाॅ ट्रिब्यूनल द्वारा सुभाष चन्द्रा की 6.50 करोड़ रूपए के भुगतान पर रोक लगा दी। पहली बार एनसीएलटी के प्रेसीडेंट जस्टिस अनुपिंदर ग्रेवाल के अध्यक्षता वाली 5 सदस्यी बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। पहले एक सदस्य द्वारा मनमाना निर्णय लेकर हजारों करोड़ों के दावे को माफ कर दिया गया था।
ऐसा केवल हमारे देश भारत में ही हो सकता है, कि एक करोड़पति की 22 हजार करोड़ रूपए माफ कर दिए जाए और गरीब के बैंक लोन की चुकारा नहीं होने पर उसे आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया जाए ! इसका एक उदाहरण ही पर्याप्त होगा। राजस्थान के नागौर जिले के चरणवास गांव के रहने वाले 36 साल के दलित और दिव्यांग किसान मंगल चंद मेघवाल उस समय परेशान हो गए, जब बैंक द्वारा दिए गए लोन का एक हिस्सा चुकाने के बाद शेष राशि नहीं चुका पाने पर बैंक ने उनके खाते को एनपीए खाते में डाल दिया। लोन वसूली के लिए पहले बैंक और बाद में बैंक द्वारा शुरू की गई कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट की ओर से उन्हें लोन वसूली का नोटिस दिया गया। मेघवाल और उनके तीन भाइयों ने वर्ष 2011 में खेती के काम के लिए एक बैंक की बादलवास शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड के तहत करीब 2.98 लाख रुपये का लोन लिया था और लोन का एक हिस्सा चुका भी दिया था।
जब सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ने उनकी जमीन जब्त करने का वारंट जारी किया तो बैंक को राजस्थान एग्रीकल्चरल क्रेडिट ऑपरेशन्स (रिमूवल ऑफ डिफिकल्टीज) एक्ट के तहत जमीन की नीलामी करने की अनुमति मिल गई। जब जमीन की नीलामी की घोषणा माइक पर की गई तो इससे परेशान होकर वह यह पता करने बैंक गए कि अभी कितनी रकम चुकानी बाकी है। बैंक मैनेजर ने उन्हें बताया कि अभी भी 4.59 लाख रुपये चुकाने हैं और ऐसा नहीं करने पर उनकी जमीन नीलाम कर दी जाएगी। उन्होंने मैनेजर से पूछा कि 2.98 लाख रुपये का लोन बढ़कर 4.59 लाख रुपये कैसे हो गया, जबकि उन्होंने पिछले साल ही 1.75 लाख रुपये चुका दिए थे।
जब बैंक मैनेजर से उन्हें कोई समाधान नहीं मिला और उन्हें लगा कि वे अपनी जमीन नहीं बचा सकते, तो उन्होंने गांव के कुछ साहूकारों से कर्ज लेकर बैंक का लोन चुकाने की सोची। लेकिन साहूकारों से भी उन्हें कोई कर्ज नहीं मिला। जब साहूकारों तथा अन्य लोगों से उन्हें पैसे नहीं मिले और उन्हें लगा कि अब जमीन को नीलामी से बचा पाना उनके वश में नहीं है, तो एक रात उन्होंने अपने कमरे में छत से लटककर अपनी जान दे दी।
यह देश का इकलौता मामला नहीं है, जिसमें किसी किसान ने बैंक की कार्रवाई से परेशान होकर अपनी जान दे दी। लगभग हर राज्य में और हर वर्ष ऐसे अनेक किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आते हैं, जिनमें आत्महत्या का कारण फसल खराब होने के बाद कर्ज नहीं चुका पाना और बैंक या साहूकार द्वारा लोन वसूली के लिए परेशान किया जाना बताया जाता है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में 10,786 किसानों और कृषि मजदूरों ने अपना जीवन समाप्त कर लिया। इनमें 4690 किसान तथा 6096 कृषि मजदूर थे। महाराष्ट्र और कर्नाटक किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्या के मामलों में देश के सभी राज्यों में सबसे ऊपर थे।
ऐसे करोड़पति एक नहीं अनेक हैं, जिनका करोड़ों रूपया माफ कर दिया गया है। विजय माल्या, मेहुल चोकसी, नीरव मोदी, जतिन मेहता तथा ऐसे कई अन्य कारोबारी बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का लोन लेने के बाद विदेश भाग गए और आज तक सरकार उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए वहां से वापस नहीं ला पाई है। जबकि एक सामान्य किसान या व्यक्ति जब बैंक से लोन लेता है तो उसके चुकारा नहीं होने पर उसके घर पर जाकर उसके घर की सामग्री जब्त करने के भी अनेक उदाहरण मिलते है। आखिर यह कब तक चलता रहेगा ? कोई तो हो इस पर रोक लगाने वाला ! किसके आगे गुहार लगाएं ?
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