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लघु कथा : सलाह नहीं, सुनने वाला चाहिए - डॉ. रीटा अरोड़ा , करनाल



लघु कथा :

सलाह नहीं, सुनने वाला चाहिए

“माँ, आज बहुत थक गई हूँ,” बेटी ने फोन पर कहा।

“ऑफिस का काम ज्यादा था?”

“नहीं माँ... जिंदगी का।”

माँ कुछ पल चुप रहीं। “बोल बेटा, क्या हुआ?”

“सुबह बच्चों की भागदौड़, फिर ऑफिस, घर लौटकर सबकी जरूरतें... कभी-कभी लगता है, सबका ख्याल रखते-रखते मैं खुद कहीं छूट गई हूँ।”

“किसी से कुछ कहा?”

“कहती हूँ तो सबके पास सलाह होती है - ऐसे करो, वैसे मत सोचो, थोड़ा आराम कर लो...”

“और तुझे क्या चाहिए?”

बेटी की आवाज़ भर्रा गई।

“कोई बस इतना पूछ ले - तू ठीक तो है? और मेरे जवाब को पूरा सुन ले।”

माँ धीरे से बोलीं, “तो आज कुछ मत संभाल... मुझे भी नहीं।”

“माँ...?”

“हाँ बेटा, आज तू बेटी बन जा। थोड़ी देर के लिए पत्नी, माँ, बहू... सब जिम्मेदारियाँ बाहर रख दे।”

उधर सिसकने की आवाज़ आई।

“रो ले,” माँ बोलीं, “मैं समझाऊँगी नहीं।”

“बस सुनोगी?”

“हाँ... माँ हूँ न, तेरी चुप्पी भी सुन लूँगी।”

- डॉ. रीटा अरोड़ा
सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर, करनाल
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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