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काव्य : देना है संदेश - राधा गोयल,विकासपुरी,दिल्ली



काव्य : 

देना है संदेश

देना है संदेश मुझे यह हर मानव को, 
करो नहीं बर्बाद इस तरह वसुंधरा को।
प्रभु ने तुमको हरा भरा संसार दिया था,
क्षुधा शान्त करने को पूर्ण आहार दिया था।

रहे प्रसन्न सदा मानव, इसलिए प्रभु ने,
रंग-बिरंगे फूलों से संसार सजाया। 
फल वाले वृक्षों से धरती को महकाया। 
भूख मिटाने को भोजन, पीने को पानी, 
रहने को आवास से वंचित रहे न प्राणी।

तरह-तरह के खनिजों से समृद्ध है धरा,
फिर भी मानव आज नहीं संतुष्ट दिख रहा।
प्रकृति के इन उपकारों को भूल गया है। 
और अधिक की चाहत में वह दौड़ रहा है ।
और अधिक की चाहत ने विध्वंस किया है।
हरी- भरी धरती का सत्यानाश किया है।

खनिजों का दोहन करके धन खूब कमाया।
इतना धन पाकर भी वह खुश न हो पाया।
इस धनलिप्सा के कारण जग में संग्राम मचा है।
लाखों काल के गाल समा गए,समय बड़ा विकराल हुआ है।

देना है संदेश, मूर्खता करनी छोड़ो।
मानवता के हित, व्यर्थ के युद्ध न छेड़ो।
जियो और जीने दो सबकी,यही सोच हो
मिल जुलकर सब रहें,कहीं न कोई युद्ध हो।

-राधा गोयल,
विकासपुरी,दिल्ली

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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