काव्य :
अनंत दूरियां हैं मगर फिर...
अनंत सालों से न जाने किसका इंतजार है।
ए साहिब, अनंत प्रेम से भरा दिल बेकरार है।
अनंत सदियों से पथ निहार रही अंखियां
अनंत आसुओं की बहा चुकी नदियां
अनंत अधूरे ख्वाबों की दुनिया साकार करने
कभी तो आयेगा मेरे साथ अनंत पथों पर चलने
जो समझ सकेगा मेरी अनंत भावनाओं को
जिसके हृदय में देख सकूंगीं अपनी आकांक्षाओं को
अनंत संभावनाएं जिनके पूरे होने की अनंत आस
अंधकार राहों में जैसे फैल जाएगा अनंत प्रकाश
अनंत सदियों से चली आ रही यात्रा होगी खत्म
तब अनंत दूरियां तय करके पंहुचेगें उपवन
अनंत सीमाओं से घिरा हुआ है जीवन
मन में आता है कि तोड़ दूं ये अनंत बंधन
अनंत आकाश में उड़ती फिरूं पंख पसार
अनंत पीड़ा से तब उभरेगा ये दिल बेकरार।
अनंत दूर क्षितिज में देखो मिल रहे धरती गगन
अनंत दूरियां हैं मगर फिर भी हो रहा मिलन।
मेरे जीवन में भी होंगी अनंत खुशियों की बहार
जब वो लेकर आएगा मेरे लिए अनंत निस्वार्थ प्यार
- सुशी सक्सेना , इंदौर
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