हिन्दी में जैसा लिखा जाता है, वैसा ही बोला जाता है - निरंजन
हिन्दी दिवस पर ऑनलाइन काव्य गोष्ठी संपन्न
रांची। हिन्दी हमारी संस्कृति, संवेदना और आत्मीयता की जीवंत अभिव्यक्ति है। इसी भाव को स्वर देते हुए झारखंड हिन्दी साहित्य संस्कृति मंच की ओर से शनिवार को हिन्दी दिवस के अवसर पर ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गीता सिन्हा ‘गीतांजलि’ द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। मंच के सचिव बिनोद सिंह ‘गहरवार’ ने अतिथियों, कवयित्रियों एवं कवियों का स्वागत किया।
काव्य गोष्ठी में गीता चौबे ‘गूँज’ ने ‘हिन्दी की अब होगी जीत’, सुनीता अग्रवाल ने ‘मातृभाषा हमारी हिन्दी’, सुजाता प्रिय ‘समृद्धि’ ने ‘जब मुँह खोलो हिन्दी बोलो’, निराला पाठक ने ‘कोशिशें तो किए निराले ने भी किसी से गुफ्तगू हो’, पूनम वर्मा ने ‘जन-जन की जिह्वा पर बसी, हिन्दी भाषा है हिंद की’, कल्याणी झा ‘कनक’ ने ‘बड़ी प्यारी सरल बोली, लगे प्यारी सहज हिन्दी’, अनिता रश्मि ने ‘मोबाइल की गिटिर-पिटिर, नहीं सुनी जाती बात पिता की’, डॉ. राजश्री जयंती ने ‘जिसे हर दिल समझता है, वो पावन प्यार है हिन्दी’, हिमकर श्याम ने ‘हिन्दी अपनी शान है, हिन्दी है अभिमान’, नेहाल सरैयावी ने ‘अपने भारत की शान है हिन्दी, मेरी आन-बान है हिन्दी’, डॉ. उर्मिला सिन्हा ने ‘हिन्दी हमारी मातृभाषा, जन-जन की अभिलाषा’, रेणु बाला धार ने ‘रहेगा जब तक अंग्रेजी का बुखार’, कामेश्वर कुमार सिंह ‘कामेश’ ने ‘ये है हमारा हिन्दुस्तान', डॉ० गीता सिन्हा गीतांजलि ने 'रामायण, महाभारत, गीता का ज्ञान है हिन्दी' तथा बिनोद सिंह ‘गहरवार’ ने ‘कब तक माता निज घर में नौकरनी बनी रहेगी’ जैसी कविताओं का पाठ किया।
संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में हिन्दी की विशेषताओं तथा इसके राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे सबसे वैज्ञानिक भाषाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि हिन्दी में जैसा लिखा जाता है, वैसा ही बोला जाता है और इसमें सब कुछ कहा जा सकता है। हिन्दी केवल शब्दों का भंडार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संवेदना का जीवंत संसार है।
उन्होंने सभी कवयित्रियों एवं कवियों की रचनाओं की सराहना करते हुए उन्हें साधुवाद दिया।
कार्यक्रम का संयोजन पूनम वर्मा ने किया, जबकि काव्य गोष्ठी का संचालन कल्याणी झा ‘कनक’ ने किया। डॉ. उर्मिला सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ काव्य गोष्ठी का समापन हुआ।
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साहित्यिक समाचार
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