हिन्दी को राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलाने सामूहिक ईमानदार प्रयासों की आवश्यकता : हिन्दी दिवस पर जागरूकता रैली निकाली गई
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर। म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन की जिला इकाई के तत्वावधान में 14 सितंबर हिन्दी दिवस के अवसर पर प्रति वर्षानुसार सरदार पटेल चौराहा से भारत माता चौराहा तक हिंदी जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में नगर की विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के प्रतिनिधि गण स्कूली विद्यार्थी, शिक्षाविद, समाजसेवी, हिन्दी प्रेमी पत्रकार लेखक बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। सभी अपने हाथों में हिन्दी सम्मान के नारों की पट्टियां लिये ओर उदघोष करते चल रहे थे। सरदार पटेल चौराहा से आरंभ होकर रैली जिला चिकित्सालय के सामने से गांधी चौराहा नेहरू बस स्टैंड होकर भारत माता चौराहा पहुंची जहां एक नुक्कड़ सभा का आयोजन हुआ।
शिक्षाविद् रमेश चंद्र चंद्रे ने संबोधित करते हुए कहा कि सन 1920 में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के अधिवेशन में कहा था कि जिस राष्ट्र की कोई भाषा नहीं होती वह राष्ट्र गूँगा होता है।आज भी हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान मिलना बाकी है। इस दिशा में ईमानदार प्रयासों की आवश्यकता है। हिंदी की बात करने वाले ही अपने बच्चों को हिंदी माध्यम अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ाते हैं। जब तक हम हिन्दी को दिनचर्या में नहीं उतारेंगे तब तक वास्तविक सम्मान नहीं दिला सकते। उन्होंने कहा कि हिंदी की शक्ति और गहराई इतनी व्यापक है आज मीडिया सिनेमा और टेलीविजन उद्योग हिंदी के ही कारण इतने लोकप्रिय हुए हैं।
समाजसेवी डॉ देवेंद्र पुराणिक ने कहा कि हिंदी के प्रति जागरूकता तो है किंतु समर्पण की अभी भी कमी है। बड़े दुर्भाग्य की बात है कि लोग हिंदी का उपहास करते हैं।
जन परिषद संस्था प्रांतीय सह सचिव वरिष्ठ पत्रकार डॉ. घनश्याम बटवाल ने कहा कि हिंदी हमारे देश की पहचान है और स्वाभिमान का प्रतीक है हमें केवल बातों में ही नहीं आचरण में भी हिंदी को आत्मसात करना चाहिए।
म. प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन की जिला इकाई के अध्यक्ष वेद मिश्रा ने कहा कि तकनीक के साथ हिंदी का भी विस्तार हो रहा है ए आई तकनीक ने हिंदी को व्यापक किया है। कंप्यूटर आया तब लग रहा था कि आप हिंदी का युग खत्म हो गया लेकिन हिंदी की शक्ति और बड़ी है। हाल ही में जो ब्रिक्स का सम्मेलन हुआ उसमें अंग्रेजी भाषा का उपयोग किसी भी किसी भी राष्ट्र अध्यक्ष ने नहीं किया। भारत बदल रहा है हिंदी को कोई खतरा नहीं है।
हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी ने कहा कि हमें भारत में ही हिन्दी के सम्मान और स्वाभिमान के लिए संघर्ष करना पड़ता है यह विसंगति पूर्ण बात है।भारत का पर्याय है हिंदी। भाषा की आत्मा के स्वर है हिंदी। दक्षिण भारत में केवल राजनेतिक कारणों से हिंदी का विरोध होता है। जबकि दक्षिण भारत के लोगों को भी अपने व्यवसाय के विस्तार और स्वयं की पहचान प्रसिद्धि बढ़ाने के लिए हिंदी का ही सहारा लेना पड़ता है।
हिंदी साहित्य परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र भावसार ने कहा कि यदि हम हिंदी के सम्मान के लिए संघर्ष करते हैं तो परिणाम आते ही हैं उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा था कि चिकित्सालय में उपचार के दौरान उन्होंने अंग्रेजी के घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया तो अस्पताल प्रशासन द्वारा उनकी बात मानकर हिंदी में घोषणा पत्र की शुरुवात की गई।
साहित्य परिषद के सचिव नंदकिशोर राठौर ने हिंदी के सम्मान में काव्य पाठ किया हिंदी मुकुट है भारत का। वरिष्ठ कवि राजेंद्र तिवारी ने कहा कि जिस प्रकार राष्ट्रगीत राष्ट्रगान और राष्ट्र ध्वज होता है उसी प्रकार राष्ट्रभाषा भी हिंदी होनी चाहिए। श्रीमती चंदा डांगी ने कहा कि हम स्वयं अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग करना बंद करें तभी हिंदी को उसका वास्तविक सम्मान मिलेगा। श्रीमती चंद्रकला सिंह ने कहा कि हमें गर्व है कि हम भारत के निवासी हैं और हिंदी इस देश की भाषा है। सरकारी कामकाज में हिंदी का ही उपयोग करना चाहिए। सूत्रधार नरेंद्र कुमार त्रिवेदी ने कहा कि हिंदी के लिए हम सब का संकल्प बहुत बड़ा है जब तक हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान नहीं मिलता हमारा संकल्प संघर्ष के रूप में जारी रहेगा।
दशपुर जागृति संगठन के संयोजक सत्येंद्र सिंह सोम ने कहा कि
हिंदी के लिए हम सब हिंदी प्रेमियों के यह छोटे-छोटे प्रयास अब परिणाम ला रहे हैं। इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी माध्यम से होने लगी है जल्द ही न्यायालय की भाषा भी हिंदी होगी।
शिक्षाविद एवं पत्रकार गायत्री प्रसाद शर्मा ने कहा कि हमें अपने बोलचाल आचरण में हिंदी का ही उपयोग करना चाहिए।1987 से मंदसौर नगर में हिंदी जागरूकता रैली की परंपरा है ऐसे ही प्रयासों से हिंदी को सम्मान मिला है। सम्मेलन की जिला इकाई के सचिव जयेश नागर ने कहा कि हिंदी को रोजगार की भाषा बनाना चाहिए। धर्म सेवी बंसीलाल टांक ने कहा कि हम सभी को अपने हस्ताक्षर हिंदी में ही करना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता अजीजुल्लाह खान खालिद ने कहा कि हिंदी है तो ही वतन है।
इस अवसर पर समाजसेवी राजाराम तंवर,दिलीप कुमार जोशी, एनसीसी अधिकारी व लोह पुरुष सरदार पटेल विद्यालय के प्राचार्य विजय सिंह पुरावत,अजय डांगी तथा कलीम शाह, राहुल पटेल, अंशुमान सिंह परिहार, मोहम्मद अर्श, दीपक साहू, देवाशीष रैकवार, हरिओम चौहान,शैलेंद्र डांगी, पुष्पेंद्र सिंह राजपूत, यश कुमावत अशोक सोनी, अरुण कुमार जैन, शम्भुसेन राठौर सहित विद्यार्थी सम्मिलित थे। संचालन सत्येंद्र सिंह सोम ने किया आभार जयेश नागर ने माना।
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