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लघु कथा : इलाज किसका हो रहा है? - डॉ रीटा अरोड़ा , करनाल



लघु कथा : 

इलाज किसका हो रहा है?

“चाचाजी, डॉक्टर ने क्या कहा?”

“कहा है, अब समोसे-कचौड़ी बंद और फल शुरू।”

भतीजा हँस पड़ा, “आप मान गए?”

“अस्पताल में पड़े आदमी के पास मानने के अलावा चारा ही क्या है!”

अगले दिन भतीजा फलों की टोकरी लेकर पहुँचा।

“ये लीजिए चाचाजी, सेब, संतरे और केले।”

चाचा ने टोकरी देखते हुए कहा, “इतने फल! लगता है बीमारी का फायदा फलवाला भी उठा रहा है।”

“आप जल्दी ठीक हो जाइए, घर पर सब आपका इंतज़ार कर रहे हैं।”

तभी चाचा की नजर भतीजे के दूसरे हाथ पर पड़ी।

“वो पैकेट किसका है?”

“कुछ नहीं चाचाजी।”

“कुछ नहीं इतना खुशबूदार?”

भतीजा सकुचाया, “बस… रास्ते में ले लिया।”

चाचा ने पैकेट खोल लिया।

“अरे! समोसे-कचौड़ी?”

भतीजा मुस्कुराया, “चाचाजी, आप फल खाइए। हम तो आपके साथ आए हैं, कुछ तो खाना पड़ेगा!”

चाचा ने हैरानी से पूछा, “मेरे साथ आए हो या समोसे खाने?”

“दोनों काम हो जाएँ तो बुरा क्या है?”

चाचा ने एक सेब उठाया और बाहर समोसे खाते भतीजे को देखते हुए बोले-

*“वाह रे बीमारी! मरीज को फल खिला रही है और रिश्तेदारों को समोसे… लगता है अस्पताल में इलाज मेरा नहीं, इनकी भूख का हो रहा है!”*

 - डॉ रीटा अरोड़ा  , करनाल
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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