काव्य :
सरदार बल्लभ भाई पटेल जी को,31 अक्टूबर जन्मदिन पर,
हर घर में जन्मे लौहपुरुष.....
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इंजी. अरुण कुमार जैन
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हिमगिरि से गंगासागर तक, यश गाथा जिनकी गाता,
राजकोट से मीजोरम तक, जन जन मन से भाता.
बिखरे, छितरे माँ आँचल को, जिसने एक कराया,
पाँच शतक सूबों को मिलाकर, भारत राष्ट्र बनाया.
लौह पुरुष सरदार, राष्ट्र ललाट चन्दन हैं, भारत माँ के दिव्य पूत का, शत शत वंदन है.
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वर्ष डेढ़ सौ बीते, करमसद मुस्काया, नादयाड की भू पर अनुपम रत्न जो आया.
शिक्षा, संस्कार पा, आगे कदम बढ़ाया,
गये विलायत, बैरिस्टर का पद भी पाया,
बारडोली के कृषकों को, आ दिया सहारा,
जीता सच्चा कृषक, कुकर्मी राज भी हारा.
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गाँधी जी के साथ चले, जन सेवा व्रत था,
संयम, दृणता और समर्पण ही जीवन था,
कोर्ट बहस में व्यस्त, तार इक इनको आया,
नहीं रहीं जीवन संगनी, सन्देश जो लाया.
किंचित भी विचलित नहीं हुये, थी बहस भी जारी,
मन के भावों पर, कर्तव्य विजय ये भारी.
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लौहपुरुष, सरदार, बने नायक भारत के,
पद प्रधानमंत्री न चाहा, बापू, नेहरू के रहते,
फिर भी खंड, खंड भारत को एक बनाया,
भोपाल, जोधपुर, हैदराबाद को, साथ मिलाया.
कश्मीर और जूनागढ़ का संताप मिटाया,
लौहपुरुष की दृनता से यह गौरव पाया.
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टूटा चश्मा, फटे वस्त्र आभूषण इनके,
श्रेष्ठ रत्न माँ के, ज्यों भट्टी सोना दहके,
15 दिसंबर 1950 वह दुर्दिन आया,
महाशोक भारत माँ का मुँह कुम्हलाया.
दूर कहीं माँ भारत का यह पूत चला था,
जननी का रूठा भाग्य, अंधकार घना था.
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जन्मदिवस पर कोटि नमन, वंदन स्वीकारें,
हर घर में जन्मे लौह पुरुष, हम सब यह चाहें,
विश्व गुरु हो भारत, युगनायक बन जाये,
सरदार पटेल से लौह पुरुष के गुण ये गाये.
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