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दिल्ली विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में वित्तीय साक्षरता एवं निवेशक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित


दिल्ली विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में वित्तीय साक्षरता एवं निवेशक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं व्यवसाय संकाय के वाणिज्य विभाग द्वारा वाणिज्य शिक्षा एवं अनुसंधान में उत्कृष्टता की हीरक जयंती तथा विश्व निवेशक सप्ताह 2026 के अवसर पर वित्तीय साक्षरता एवं निवेशक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रो. वी.के. श्रोत्रिया, डीन, वाणिज्य एवं व्यवसाय संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय के संरक्षण में आयोजित किया गया तथा इसका आयोजन प्रो. अमित कुमार सिंह, प्रोफेसर, वाणिज्य एवं व्यवसाय संकाय तथा निदेशक, वित्तीय साक्षरता समिति, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. रुचि चोजर, कार्यकारी निदेशक, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि प्रो. आर.के. सिंह, प्रोफेसर, वाणिज्य एवं व्यवसाय संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय, विशिष्ट अतिथि रहे। श्री सूर्यकांत शर्मा, वरिष्ठ सलाहकार, भारत में म्यूचुअल फंड संघ (एएमएफआई), ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में अपनी सहभागिता दी, जबकि प्रो. सुनैना कनोजिया, प्रोफेसर, वाणिज्य एवं व्यवसाय संकाय, ने वित्त क्षेत्र की समन्वयक के रूप में कार्यक्रम में योगदान दिया।
छात्रों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. रुचि चोजर ने निवेशकों की जागरूकता एवं सुरक्षा के लिए सेबी द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों और डिजिटल मंचों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पूंजी बाजार में भागीदारी से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से की जा रही विभिन्न पहलों की जानकारी दी तथा वित्तीय बाजारों की अखंडता एवं स्थिरता बनाए रखने में बाजार जोखिम की भूमिका को समझाया। विशिष्ट अतिथि प्रो. आर.के. सिंह ने वित्तीय समझ विकसित करने के लिए धैर्य को महत्वपूर्ण मंत्र बताते हुए कहा कि निवेशकों के लिए धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने सीमित तर्कसंगतता और व्याख्याशास्त्र जैसी अवधारणाओं की चर्चा करते हुए बताया कि ये निवेशकों को आलोचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और अधिक सूचित वित्तीय निर्णय लेने में सहायता कर सकती हैं। श्री सूर्यकांत शर्मा ने निवेशकों की सुरक्षा एवं वित्तीय शिक्षा के क्षेत्र में सेबी की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया तथा इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को यह सीखना चाहिए कि अपने धन को अपने लिए कैसे उपयोगी बनाया जाए और सूचित निवेश निर्णयों के माध्यम से संपत्ति का निर्माण कैसे किया जाए।
प्रो. वी.के. श्रोत्रिया, डीन, वाणिज्य एवं व्यवसाय संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय ने वाणिज्य विभाग और सेबी के बीच सहयोगात्मक संबंधों का उल्लेख करते हुए अच्छे एवं संतोषपूर्ण जीवन के लिए आय तथा वित्तीय कल्याण के महत्व को रेखांकित किया। प्रो. अमित कुमार सिंह ने वित्तीय स्थिरता प्राप्त करने के लिए वित्तीय साक्षरता, बजट निर्माण, आपातकालीन निधि तथा चक्रवृद्धि की शक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि वित्तीय साक्षरता कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक आवश्यक जीवन कौशल है। प्रो. सुनैना कनोजिया ने पूंजी बाजार, विशेष रूप से वस्तु व्यापार, में भाग लेने वाले निवेशकों के लिए धैर्य के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने निवेश संबंधी निर्णयों पर झुंड व्यवहार के प्रभाव की चर्चा करते हुए बेहतर निवेश परिणामों के लिए बिना पर्याप्त जानकारी के दूसरों का अनुसरण करने से बचने के महत्व को समझाया।
सत्र को आगे बढ़ाते हुए प्रो. एच.के. डांगी ने वित्तीय साक्षरता से संबंधित आंकड़ों के संदर्भ में महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े विरोधाभास को प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रचार की प्रभावी पंक्ति, “वित्तीय साक्षरता का अर्थ है प्रो. अमित कुमार सिंह”, के माध्यम से वित्तीय साक्षरता के महत्व को एक आवश्यक जीवन कौशल के रूप में रेखांकित किया।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों को अपनी वित्तीय जागरूकता एवं सुरक्षा बढ़ाने के लिए व्यावहारिक जानकारी और उपयोगी संसाधनों से परिचित कराया गया। छात्रों को सेबी सारथी और सेबी चेक जैसे संसाधनों की जानकारी दी गई तथा सेबी द्वारा शुरू की गई नई पहलों, जिनमें जागरूक और मस्ट शामिल हैं, के बारे में भी अवगत कराया गया। मुख्य अतिथि ने छात्रों को एनआईएस से जुड़ने तथा सूचित एवं प्रभावी निर्णय लेने की आदत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। छात्रों को ऐसे धोखाधड़ीपूर्ण निवेश प्रस्तावों और वित्तीय घोटालों से सावधान रहने की सलाह दी गई, जिनमें असामान्य रूप से अधिक लाभ का वादा किया जाता है। कार्यक्रम ने छात्रों को वित्तीय रूप से जागरूक, अनुशासित, जिम्मेदार एवं सूचित निवेशक बनने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच वित्तीय साक्षरता, निवेशक जागरूकता, जिम्मेदार निवेश व्यवहार तथा सूचित वित्तीय निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम का समापन प्रो. एच.के. डांगी, प्रोफेसर, वाणिज्य एवं व्यवसाय संकाय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, विशेषज्ञ वक्ता, संकाय सदस्यों तथा छात्रों के मूल्यवान सहभागिता एवं योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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