बम्हौरी के पं० जुगल किशोर त्रिपाठी ने फिर किया क्षेत्र का नाम रोशन, काशी विद्यापीठ बनारस द्वारा मिला मानद उपाधि स्वरुप विद्या वाचस्पति सम्मान
प्रयागराज! शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को हिन्दुस्तानी अकेदमी, प्रयागराज में जगदीश साहित्य संस्थान प्रयागराज और काशी विद्यापीठ वनारस के सौजन्य से प्रयागराज में हुए भव्य राष्ट्रीय कवि-सम्मेलन में पं० जुगल किशोर त्रिपाठी (साहित्यकार बुन्देलखण्ड) को मानद उपाधि देकर सम्मानित किया गया। उन्हें मानद उपाधि स्वरुप विद्यावाचस्पति सम्मान, शाॅल, रेशमी वस्त्र और स्मृति-चिन्ह तथा स्मारिका काशी विद्यापीठ बनारस के कुलसचिव डाॅ० इन्द्रजीत तिवारी और जगदीश साहित्य संस्थान प्रयागराज की संस्थापिका जगदीश कौर ने सप्रेम भेंट की गयी।
यह सम्मान और प्रमाण-पत्र पं० जुगल किशोर त्रिपाठी को उनकी सुदीर्घ हिन्दी सेवा, सारस्वत साधना, कला क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान और उपलब्धि, शैक्षिक प्रदेयों, महनीय शोधकार्य, सेवा कार्य तथा उनकी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के आधार पर दिया गया। इसके साथ उन्हें प्रयागराज काव्य महाकुंभ में शब्दश्री सम्मान-2026 देकर भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पं० जुगल किशोर त्रिपाठी जी ने अपनी प्रसिद्ध रचना "हँसते जख्म" और "मैं शिक्षक हूँ" पढ़कर सबकी वाह-वाही लूटी और कहा कि साहित्यकार ही समाज की पीड़ा, वैचैनी, अभाव और छाये हुए तनाव को अच्छी तरह पहचान कर उसका निराकरण का उपाय देनें में सक्षम है और अपनी कविताओं में वह सबकै मन में राष्ट्र-प्रेम, राष्ट्र-भाषा और माता-पिता, गुरुओं, हमारे लुप्तप्राय सनातन धर्म और सनातन संस्कृति और सभ्यता, जिसकी आज देववासियों को बहुत जरूरत है, की हुँकार भर अलख जगाता है। सबको एक और भारत का अभिन्न अंग बताता है। आत्मा सबकी रहै स्वच्छंदमय, नभ, धरा, क्षितिजों, तरंगों में विलय, के अनुरूप कवि की सबकी जगह पकड़ और गमन है, उसकी दृष्टि से कोई चीज अछूती और अंजानी और अनदेखी नहीं रह सकती इसमें समय और दूरी अपना प्रभाव नहीं डाल सकते। राष्ट्रीय कवि-सम्मेलनों और सम्मान समारोह कार्यक्रमों में ये संस्थायें नव-कवियों में चेतना जाग्रत कर उन्हें सबके सम्मुख लाती हैं, जो कि बहुत सुन्दर कार्य है। श्री त्रिपाठी ने कहा कि यह सम्मान और उपाधि उनके जीवन की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि है, जिसने उनको विश्व-पटल पर सबके सम्मुख लाकर खड़ा कर दिया। उन्होंने इस महोत्सव के आयोजन हेतु काशी विद्यापीठ बनारस के कुलपति डाॅ० इन्द्रजाल तिवारी जी तथा जगदीश साहित्य संस्थान प्रयागराज की संस्थान जगदीश कौर जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देकर उनका आभार व्यक्त किया।
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