जीने दो मुझे
परिवार समाज रिश्ते
क्यों है हावी मुझ पर
इन्सान हूँ मैं ..एक इन्सान
मुझे भी जीने दो …..
त्याग तपस्या समर्पण
क्यों लागू है केवल मुझ पर
समाज का आधा हिस्सा हूँ
मुझे भी जीने दो …..
रंग जाती असमानता के भेद
का बोझ है क्यों मुझ पर
जानवर नहीं औरत हूँ
मुझे भी जीने दो ……
शिक्षा आर्थिक आज़ादी का
अभाव क्यों हो मुझ को
लड़की होना मेरा दोष नही
मुझे भी जीने दो…….
देवी भोग या कमजोर नहीं
काम में किसी से कम हैं क्या
तक़दीर से हर पल क्यों लड़ें
मुझे भी जीने दो…….
कुन्ना चौधरी
जयपुर
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