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लघुकथा : पहली बारिश - सुरेश पटवा,भोपाल

 


लघुकथा : पहली बारिश 

वैशाख-ज्येष्ठ की झुलसती गर्मी के बाद आषाढ़ में आर्य भूमि पर वर्षा की बूँदे रूमानी मौसम की बहार लाती हैं। सावन-भाद्र मास में पृथ्वी पर हरी घास की मख़मली चादर बिछ जाती है। जीव-जंतु, पेड़-पौधे सर्वत्र सृजन के खेल में मस्त होने लगते हैं। रीति क़ालीन संयोग शृंगार के गीत हृदय में आनंद का संचार करते हैं। प्रियतम से दूर स्त्रियाँ विरह गीत गाकर उन्हें उलाहना देकर बुलाती हैं। वियोगी गीत मन में टीस जगाते हैं। काले बादलों से झरती रिमझिम फुहारों में नहाए बागों में मोर नाचने और पावस गोष्ठियों में कवि बरसने लगते हैं। 

अब सीमेंट क्रांकीट से सुसज्जित आधुनिक कालोनियाँ बस गई हैं। वहाँ मोर देखने को नहीं मिलते हैं। कसे परिधान में सिर्फ़ मोरनियाँ बिचरती हैं। झोला छाप कवि गोष्ठियों से निकल कालोनियाँ में हल्के होने की जुगाड़ ढूँढते फिरते हैं। सावन-भादों के दिनों में कवि गोष्ठी से चाय-पानी पीकर साहित्यकार कभी इन नई कालोनियों में पहुँच जाए तो फ़ुरसत होने का ठिकाना ढूँढते-ढूँढते बारिश के पानी में ख़ुद का पानी मिला रसारस होकर घर वापस पहुँचता है।” 

एक दिन लेखक जब रसारस हालत में घर पहुँचे तो घर वाली ताना देती बोली - साहित्य रस में डूब कर आ गये। लगे हाथ झोला पकड़ो और नुक्कड़ से मिर्ची धनिया ले आओ। भजिआ का बेसन लगा है। आकर भजिया तलो। पहली बरसात है। बूँदों में रूमानियत  ठसाठस भरी है। 

लेखक ने कहा- हम सूतक से हैं। तुम भजिया भगवान को चढ़ाओगी। 

वे अकबका कर बोलीं- काय का हो गओ, कोनऊ साहित्यकार तुमरी कविता सुन के टपक गओ का? मिट्टी में गए थे?  

लेखक ने कहा - ऐसा कुछ नहीं हुआ।  मिट्टी में नहीं जा पाया, यही तो तकलीफ़ है। भगवान और भक्त का पानी एकसार हो गया।  

हे भगवान, सत्यानाश हो तुमरे साहित्यकार शौक़ को, ऐसे कैसे ढिलयाय गये, कै रास्ता में ही निपक गये, नैक रोक नै सकत थे। घर आकर बगर जाते। 

पत्नी नीची गर्दन किए उनके परिधान से पानी टपकता और साहित्यकार पत्नी का चेहरा देखते रहे। बाहर मानसून की झड़ी लगी थी और दरवाज़े पर साहित्यकार की पैंट चुआ रही थी।     

- सुरेश पटवा,भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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