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काव्य : नदी वह - डॉ ब्रजभूषण मिश्र,भोपाल


 

नदी वह


भरता है बूंद बूंद से घट

जानती है ये, भावी नदी

यात्रा पर, मंद गति ,चलती है

पर्वतों की तलहटी में,पलती है


यात्री है वह,चलने का,

सतत धर्म,निभाती रहती

प्रसन्न है,गतिमान है, वह

हर पथ,मोड़,कल कल करती है


बाधाएं,राह में,उसके हैं

गति का संगीत,निज वश में है

मित्र,सखा,बना लेती,नालों को भी

विशाल रूप,अंततः धरती है


हरियाली का,प्रतिदान करती

निज अहम,त्यागती रहती है

धरा ,पर धाराएं बिखेरती चलती

*ब्रज*,नदी वह, जीवनदान करती है 


- डॉ ब्रजभूषण मिश्र

मुंबई प्रवास

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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