जीवन उसका जो जीना जानता है - सुशील दोशी
ग्वालियर। लोकप्रिय होने से भी बड़ी बात है एक अच्छा इंसान होना। महज लोकप्रिय होने में कोई सार्थकता नहीं है। इंसान की आंखों में जो सपने होते हैं उन्हें पूरा करने की सच्ची प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है।
सुप्रसिद्ध क्रिकेट कमेन्टेटर पद्मश्री से सम्मानित सुशील दोशी ने ' चर्चा मंडल ' द्वारा ग्वालियर के होटल तानसेन में आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।
इस अवसर पर जाने माने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी अमय खुरासिया, वरिष्ठ पत्रकार एवं सम्पादक डा. सुरेश सम्राट, क्रिकेट कमेन्टेटर नवीन श्रीवास्तव, क्रिकेट के कोच अरुण सिंह मंच पर उपस्थित थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चम्बल की छवि निखारने की दिशा में सक्रिय राकेश रुस्तम सिंह ने की।
सुशील दोशी ने नैसर्गिक और प्रतिबद्ध प्रतिभाओं की कद्र करने की जरूरत बताते हुए कहा कि बाजा उसका होता है जो उसे बजाना जानता है। प्रतिभा के साथ विनम्रता हो तो व्यक्ति का प्रभाव और दायरा बढ़ता है।
श्री दोशी ने क्रिकेट कमेन्टेटर के रूप में अपने संस्मरण बताते हुए कहा कि एक बार क्रिकेट के किंवदती पुरुष कीथ मिलर चुपचाप पीछे खड़े होकर उनकी हिन्दी कमेन्टरी सुनने के बाद तारीफ में कहा कि आप जो बोल रहे हैं वह मुझे समझ में तो नहीं आ रहा लेकिन आवाज बहुत मधुर है। इस प्रशंसा ने सुशील दोशी का आत्मविश्वास बढ़ाया।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी अमय खुरासिया ने सचिन तेंदुलकर की समय की पाबंदी का उल्लेख करते हुए कहा कि वे हमेशा निर्धारित समय से पंद्रह मिनट पहले पहुंचते थे। उन्हें आगे बढ़ाने में इस अनुशासन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अमन खुरासिया ने बहुत ईमानदारी से यह भी कहा कि उनके परिचय में अनेक स्थान पर यह कहा या लिखा जाता है कि उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की है, जो कि सही नहीं है। उन्होंने समाज में अच्छी भाषा और संवेदनशीलता की जरूरत बताते हुए कहा कि डिग्रियाँ नहीं, सच्चे मायने में शिक्षित होना जरूरी है।
वरिष्ठ पत्रकार एवं सम्पादक डा . सुरेश सम्राट ने कहा कि सुशील दोशी और अमय खुरासिया की शख्सियत बताती है कि क्रिकेट का गहरा सम्बन्ध सहिष्णुता और विनम्रता से है। सुशील दोशी पहले उद्घोषक हैं जिन्होंने हिन्दी में क्रिकेट की कमेन्टरी को इतना प्रभावी बनाया कि लोग अंग्रेजी की कमेन्टरी के बाद हिन्दी कमेन्टरी सुनने के लिए प्रतीक्षा करते थे। डॉ सम्राट ने सुशील दोशी की मनोविज्ञान की समझ की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें पता रहता है कि श्रोता कब क्या सुनना चाहता है।
श्री अरुण सिंह व नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि खेल को साहित्य और विमर्श का विषय बनाने से और उससे जुड़ी शख्सियतों के साथ बैठने से नयी पीढ़ी को भी बहुत कुछ जानने और समझने को मिलता है।
कार्यक्रम का संचालन अध्येता व अध्यापक जयन्त सिंह तोमर ने किया। इस अवसर पर नगर के अनेक गणमान्य प्रबुद्ध जन उपस्थित थे ।
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