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काव्य : बरसात में - श्रीमती सविता बांगड़ *सुर*भोपाल


 काव्य : 

बरसात में

 मन का मयूरा नाचे रे बरसात में

1. धरती पर पड़े फुहार मन प्रसन्न हो जाए रे,

 हरी भरी धरती देखो मन में ही लहराए रे,

 वृक्षों पर यौवन सा छा जाए रे बरसात में।


 2. सुंदर मोहक फूलों की खुशबू उड़ी  जाए रे,

 शीतल मंद पवन सबके मन को लुभाए  रे ,

घन गरजे बिजुरी चमक जाए रे बरसात में ।


3.कारी बदरिया, रिमझिम रिमझिम बरसाए रे,

 गए परदेस पिया मिलन को तरसाए रे,

पीहू पीहू पपीहा बुलाए रे बरसात में।


4. प्रकृति का श्रृंगार सबके मन को लुभाए रे,

नदी ताल झरना, संगीत नव सुनाएं रे.  

 लिखने में कलम संवर जाए रे बरसात में ।

कवि की कल्पना मुस्काए रे बरसात में।


- श्रीमती सविता बांगड़ *सुर*भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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