लघुकथा
केरोके
वीकेण्ड नजदीक आ रहा था | जोगोन्नाथ के सारे भारतीय मित्रों ने मिल कर नितेश के घर पर केरोके संगीत का प्रोग्राम करने का निर्णय लिया था । विदेशो में रहने वाले भारतीय लड़के और लडकियाँ अपने वीकेंड में या छुट्टियों में ज्यादातर आपस में मिलते हैं, साथ खाते-पीते है, कभी ताश पार्टी कभी कोई गेम कभी म्यूजिक केरोके | भारतीय त्योहार भी सब मिलजुल कर मनाते हैं।
भारत से बच्चे अपने हाइयर एडूकेशन के लिये या नौकरी के लिये ज्यादातर यू०एस, इंग्लैंड या यूरोपियन कनट्री जाने लगे है |अपने माँ-बाप, परिवार को छोड़कर ये बाहर रहने लगे हैं | समय-समय पर उन्हें भी अपने घर की याद आ ही जाती है और सब इकठ्ठा हो अपने तरीके से सब कुछ सेलिब्रेट करते है |
सुतापा और जोगोन्नाथ दोनो करीब दस साल से यू०एस के एक शहर में रह रहे है | दोनों आई. टी. सेक्टर में कार्यरत है। उनका दो साल का एक बेटा है । कार्य में व्यस्तता अधिक रहने के कारण उन्हें बच्चे की देखभाल और उसकी परवरिश की बहुत समस्या हो जाया करती थी, दोनों का फुल टाइम जॉब, कभी ऑफिस कभी घर । सुतापा अक्सर अपने माता-पिता को चार-पाँच महीने के लिये यू०एस बुला लिया करती थी। उनके रहने से वो घर के लिये और बच्चे के लिए काफी निश्चित रहती थी | सुतापा को अपने पेरेंट्स के साथ समय बिताना अच्छा लगता था | जोगोन्नाथ ने भी कई बार अपने पेरेंटस को बुलाना चाहा, सुतापा से जिक्र भी किया पर हर बार सुतापा उसकी बात को चाहे तो इगनोर करती या टाल जाती थी । जोगोन्नाथ चुप होकर रह जाता और इस तरह यू०एस में रहते उनके दस साल बीत गये। अपनी मेहनत और कमाई से दोनों ने वहीं बड़ा - मकान भी ले लिया और सभी सुख - सुविधाओं से अपने घर को पूर्ण भी कर लिया | जोगोन्नाथ माँ बाप का इकलौता बेटा था । पिता एक साधारण क्लर्क थे और उनकी आर्थिक स्थिति गाँव में अच्छी नहीं थी। जब जोगोंन्नाथ को कुछ समझ नही आता तो वह कुछ पैसे माँ - बाप को भेज देता पर अंदर ही अंदर परेशान भी रहता था |
केरोके का प्रोग्राम जोरो से चल रहा था। सभी लड़के-लड़कियाँ आगे बढ़-बढ़ अपनी प्रस्तुति दे रहे थे | जोगोन्नाथ की रूचि शुरू से ही संगीत में थी और वो पुराने भारतीय सिंगर के गाने हमेशा गाया करता था | जब कभी केरोके का प्रोग्राम या कभी शादी या बर्थडे पार्टी होती थी तो जोगोन्नाथ को जरूर याद किया जाता था । उस दिन जैसे ही स्टेज पर जोगोन्नाथ का नाम एनाउंस हुआ, वह तुरंत उठ कर माइक की तरफ गया । उस दिन उसने तारे जमीं पर फिल्म का गाना - मै कभी बतलाता नहीं.......... तुझे सब पता है ना माँ, मेरी माँ गाना शुरु किया, सबने तालियों की गडगडाहट के साथ उसका स्वागत किया। दो पंक्तियां गाते-गाते ही मानो उसका गला रूंध गया हो और वो जोर से रो पड़ा | सभी परेशान हो उठे और किसी तरह जोगोन्नाथ को चुप कराया | सुतापा ने जब यह देखा तो अंदर ही अंदर वह आत्मग्लानि से भर उठी, जैसे वह सब समझ गयी हो |
आज जोगोन्नाथ सुबह से ही ऑफिस की तैयारी में जुटा था | उसने देखा सुतापा सुबह से ही लैपटॉप लेकर बैठी है जबकि उसकी ऑफिस दस बजे से शुरु होती थी । थोड़ी देर बाद सुतापा अपनी कुर्सी से उठी और जोगोन्नाथ के पास आकर बोली - अगले महीने हम लोग इंडिया जा रहे हैं। टिकट कन्फर्म हो गया है। इस बार लौटते हुए साथ में तुम्हारे मम्मी – पापा का भी टिकट करा लिया है | बहुत दिन हो गए है , चैतन्य अपने दादी - बाबा से मिला नहीं है और हमलोग भी | जोगोन्नाथ अवाक हो सुतापा को देखता रह गया उसने कोई जवाब नहीं दिया | थोड़ी देर बाद अपनी गाड़ी स्टार्ट कर गुनगुनाते हुए वह ऑफिस के लिये निकल गया ।
- सुमन चंदा , लखनऊ
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कहानी को ह्रदय तल की गहराइयों से महसूस किया जा सकता है. बेहद मार्मिक कहानी है.
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