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साहित्य सभी को साथ लेकर चलता है - डॉ विनय कुमार पाठक


 

साहित्य सभी को साथ लेकर चलता है - डॉ विनय कुमार पाठक

 रायपुर।  संस्कृति  और आध्यात्म भारतीय साहित्य की मौलिकता है  और साहित्य सभी को साथ लेकर चलता है । तुलसी साहित्य अकादमी  के द्वारा पूरे छत्तीसगढ़ के नवोदित साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ साहित्यिक कृतियों के प्रकाशन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ये उद्गार थावे विद्यापीठ, गोपालगंज, बिहार के कुलपति ,छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष ( राज्य मंत्री दर्जा ) तथा तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ विनय कुमार पाठक  ने   सोमवार को वृंदावन  हाॅल रायपुर में तुलसी साहित्य अकादमी, रायपुर इकाई द्वारा   आयोजित हिंदी तथा छत्तीसगढ़ी साझा कविता संकलन "तुलसी पल्लव"  में शामिल रचनाकारों के काव्य गोष्ठी सह सम्मान समारोह में व्यक्त किये ।

 गौरतलब है कि भारती यादव 'मेधा' तथा डॉ विभाषा मिश्र द्वारा संपादित  "तुलसी पल्लव" साझा संकलन में  छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ तथा नवोदित तीस रचनाकारों की  रचनाएँ शामिल है। रचनाकारों के सम्मान हेतु सोमवार 15 जुलाई  को आयोजित इस सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि  थावे विद्यापीठ, गोपालगंज, बिहार के कुलपति तथा छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष ( राज्य मंत्री दर्जा )आदरणीय डॉ विनय कुमार पाठक जी थे ।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ भाषाविद् एवं साहित्यकार  आदरणीय डॉ चितरंजन कर ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ी व हिंदी लघुकथाकार एवं कवि आदरणीय श्री बलदाऊ राम साहू, तुलसी साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ के प्रान्ताध्यक्ष आदरणीय डॉ राघवेंद्र कुमार दुबे तथा वरिष्ठ साहित्यकार व समीक्षक आदरणीय डॉ ए के यदु कार्यक्रम में मौजूद थे ।

          अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि डॉ विनय कुमार पाठक जी ने कहा कि नए संगठनों से ही नई-नई प्रतिभाएँ उभर कर आती है। साहित्य सभी को साथ लेकर चलता है। उन्होंने कहा कि जैसे देश के अन्य राज्यों से महिला साहित्यकार आगे आ रही हैं वैसे ही हमें छत्तीसगढ़ की महिला साहित्यकारों को आगे बढ़ाना है, राष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी साहित्यिक पहचान का दर्ज करानी है। 

                    अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रसिद्ध भाषाविद व विद्वान डॉ चित्तरंजन कर जी  ने कहा कि हमें आत्ममुग्ध नहीं होना चाहिए ,अपने साथ साथ  दूसरों की रचनाएं भी पढ़ना,समझना और सराहना चाहिए और अपनी त्रुटियों को सुधारने का प्रयास करना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि बलदाऊ राम साहू जी  ने  कहा कि हर रचनाकार को दूसरे की अच्छी रचना की प्रशंसा करनी चाहिये,उसे प्रोत्साहित करना चाहिए, दूसरों की निंदा से बचें, किसी की त्रुटियां भी बतानी हो तो सहज सम्मान जनक तरीके से बताएं,उसकी आलोचना कर उसे पीछे ना धकेलें ।

डॉ राघवेंद्र दुबे जी ने कहा कि लेखन में निरंतर बेहतरी का प्रयास करते रहने से ही रचनाओं में उत्कृष्टता आती है । अपने लिखे हुए को  बार बार पढ़ें और संशोधित करें , इसी में रचना की सार्थकता है।

डॉ ए के यदु जी ने कहा कि तुलसी पल्लव साझा संग्रह में शामिल उभरते  रचनाकार तुलसी के नव पल्लव हैं , इन्हें पोषित कर व मार्गदर्शन देकर तुलसी का बिरवा बनाने की जिम्मेदारी सभी वरिष्ठ साहित्यकारों पर है ,जो इन्हें गुरु की तरह आगे ले कर जाएं। यदु जी ने रायपुर इकाई की अध्यक्ष भारती यादव मेधा सहित सभी सदस्यों को रायपुर इकाई द्वारा किये जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए बधाई दी ।

      रायपुर इकाई अध्यक्ष भारती यादव 'मेधा'  ने बताया कि नाम अनुरूप नव और कोमल भावनाओं,अनुभूतियों , विचारों को समेटे हुए यह "तुलसी पल्लव" संकलन  जहाँ वरिष्ठ साहित्यकारों की लेखनी से समृद्ध हुआ है ,वहीं नवोदित कलमकारों ने भी अपनी सशक्त विचाराभिव्यक्ति प्रस्तुत की है।  विद्यालय तथा महाविद्यालय में अध्ययनरत युवा कलमकारों की लेखनी  ने इस कविता संकलन को विशेष बनाया है।  इस साझा कविता संकलन में डॉ जया सिंह,राजेश चौहान, राम मणि यादव,  श्रीमती माधुरी कर, डॉ रश्मि चौबे,डॉ इंद्रदेव यदु, भारती यादव 'मेधा',  डॉ विभाषा मिश्र, डॉ आस्था दीवान,नीलम द्विवेदी, नंदिनी लहेजा,प्रीती देवी,अनामिका शर्मा 'शशि', यशवंत यदु,योगिता तलोकर, डी.एन.कराड़े, डॉ श्वेता शर्मा, अनामिका पीयूष मिश्रा, जया गंगबोईर, पूनम देवांगन, दीपिका चौहान ,ललिता साहू, डिकेश्वर साहू, राजकुमार निषाद,कोमल कांत यादव,सविता विश्वास,नागेश वर्मा, राकेश कुमार साहू,ईश्वर निषाद,खिबी राम साहू ने अपनी लेखनी चलाई है।  कार्यक्रम का संचालन भारती यादव मेधा तथा डॉ विभाषा मिश्र द्वारा किया गया। आभार प्रदर्शन राजेश चौहान जी द्वारा किया गया ।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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