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काव्य : अतिचार किया है - आर एस माथुर , इंदौर


 काव्य : 

अतिचार किया है


सांसों पर अधिकार किया है ।

हां    इतना विस्तार किया है ।


साबित   बचा नहीं  घर कोई ।

बस्ती को   मिsमार किया है ।


मुस्कानें      नोची    चेहरों से।

दूर       कहीं  भंडार किया है।


हम  सबसे था बैर  कभी का ।

इतना     दुर्व्यवहार  किया है ।


हाथ     उठा दो उसके हक में।

यह  कैसा अतिचार  किया है।


- आर एस माथुर , इंदौर


मिस्मार। ध्वस्त

अतिचार*दुर्व्यवहार

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

1 Comments

  1. मैने भी व्यविचार किया है

    ये कैसा अतिचार किया है

    जीवन के दुखों का मैने पुनः आज विचार किया है

    सुंदर रचना sir 🙏

    ReplyDelete
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