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सरोकार : उनसे क्या आस करें जो हो अपराधों में लिप्त ? - डॉ. चन्दर सोनाने , उज्जैन


 सरोकार :

 उनसे क्या आस करें जो हो अपराधों में लिप्त ?

  - डॉ. चन्दर सोनाने , उज्जैन

                         हाल ही में चुनाव सुधार संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में देश के कुल 643 मंत्रियों के चुनाव के समय दिए गए शपथ पत्रों का विश्लेषण किया गया। इसमें यह पाया गया कि देश में 47 प्रतिशत मंत्रियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। इतना ही नहीं 174 मंत्रियों पर गंभीर आरोप भी लगे हैं। अब ऐसे मंत्रियों से आमजन क्या आस करें, जो अपराधों में लिप्त हो ?

                        एडीआर की रिपोर्ट ने देश के 27 राज्यों और 3 केन्द्र शासित प्रदेशों तथा केन्द्र सरकार के कुल 643 मंत्रियों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया। इन शपथ पत्रों के अनुसार देशभर के 302 मंत्री, जो करीब 47 प्रतिशत होते हैं, ने खुद पर आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की बात स्वीकार की हैं। इतना ही नहीं इन मंत्रियों में से 174 मंत्री, ऐसे भी है जिन पर हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ जैसे गंभीर आरोप भी हैं।

                        इस रिपोर्ट के अनुसार केन्द्र सरकार के 72 मंत्रियों में से 29 मंत्रियों ने जो करीब 40 प्रतिशत होते है, अपने पर आपराधिक केस होने की बात स्वीकार की हैं। एडीआर की इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चुनावों के समय जिन शपथ पत्रों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है वे 2020 से 2025 के दौरान दाखिल किए गए थे।

                        एडीआर की उक्त रिपोर्ट के संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने हाल ही में एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिन की गिरफ्तारी के बाद पद से हटाने की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव के कुछ दिन बाद ही एडीआर की यह रिपोर्ट सामने आई है। इस कारण से इस रिपोर्ट की बड़ी अहमियत है।

                       आपराधिक प्रकरणों में लिप्त पाए गए इन मंत्रियों में लगभग सभी दलों के मंत्री शामिल पाए गए हैं। जैसे भाजपा के 336 मंत्रियों में से 136 पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। यह 40 प्रतिशत है। इसके साथ ही 88 मंत्रियों पर गंभीर आरोप हैं। यह 26 प्रतिशत पाया गया है। कांग्रेस के 61 मंत्रियों में से 45 मंत्रियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। यह 74 प्रतिशत है। यही नहीं इस पार्टी के 18 मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। यह 30 प्रतिशत पाया गया है।

                        इसी प्रकार डीएमके के 31 मंत्रियों में से 27 पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। यह 47 प्रतिशत है। इस दल के 14 मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। यह 45 प्रतिशत पाया गया है। टीएमसी के 40 मंत्रियों में से 13 पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। यह 33 प्रतिशत है। इस दल के 8 मंत्रियों पर गंभीर आरोप हैं। यह 20 प्रतिशत पाया गया है। तेलुगु देशम पार्टी ( टीडीपी ) के 23 मंत्रियों में से 22 मंत्रियों पर आपराधिक प्रकरण हैं। सह सर्वाधिक 96 प्रतिशत है। इस दल के 13 मंत्रियों पर गंभीर प्रकरण है। यह 57 प्रतिशत पाया गया। आम आदमी पार्टी के 16 में से 11 मंत्रियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज है, जो 69 प्रतिशत है। इस दल के 5 मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगे है। यह 31 प्रतिशत पाया गया।

                       आपराधिक प्रकरणों में लिप्त पाए गए मंत्रियों की राज्यवार स्थिति भी चौंकाने वाली है। आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और पुडुचेरी में 60 प्रतिशत से ज्यादा मंत्री आपराधिक मामलों में आरोपी पाए गए हैं। इस स्थिति में 4 राज्यों के मंत्रियों से आशाजनक खबर भी है। ये राज्य हैं- हरियाणा, जम्मूकश्मीर, नागालैंड और उत्तराखंड। इन राज्यों के किसी भी मंत्री पर कोई आपराधिक प्रकरण नहीं पाया गया है।

                         एडीआर की रिपोर्ट में आपराधिक प्रकरणों में लिप्त मंत्रियों की सम्पत्ति का भी विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार कुल 643 मंत्रियों की कुल सम्पत्ति 23,929 करोड़ रूपए है। औसतन हर मंत्री के पास 37.21 करोड़ रूपए की सम्पत्ति है। 30 विधानसभाओं में से 11 विधानसभाओं में अरबपति मंत्री है। कर्नाटक में सबसे ज्यादा 8 अरबपति मंत्री है। इसी प्रकार आन्ध्रप्रदेश में 6 और महाराष्ट्र में 4 मंत्री है। केन्द्र सरकार के 72 मंत्रियों में से 6 मंत्री अरबपति है। यह सर्वज्ञात गोपनीय सत्य है कि चुनाव में मंत्री या उम्मीद्वार अपने शपथपत्र में जो सम्पत्ति घोषित करता है, वह एक नम्बर की यानी व्हाईट मनी होती है। आमजन में यह मान्यता है कि वास्तव में उनके पास जो सम्पत्ति बताई जा रही है, उससे कम से कम 10 से 50 गुना ज्यादा होती है !

                          एडीआर की उक्त रिपोर्ट आम नागरिकों के लिए एक चौंकाने वाली खबर है। जब केन्द्र और राज्य सरकार के इतने सारे मंत्रियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और अनेक पर गंभीर आरोप लगे हैं, ऐसी स्थिति में आमजन यह सोच रहा है कि ऐसे मंत्रियों से क्या आशा रखें जो खुद आपराधिक प्रकरणों में लिप्त हो ? इस समस्या का क्या निदान है ? आमजन को चुनाव के समय यह सोचना चाहिए कि वे खुद ये तय करें कि जो उम्मीद्वार उनके सामने है, उस पर यदि कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और गंभीर आरोप लगे हैं, तो उन्हें कदापि नहीं चुने ! जब तक आमजन यह तय नहीं करेगा, तब तक ऐसे ही आपराधिक प्रकरणों में दर्ज और गंभीर आरोपों में लिप्त पाए गए मंत्री ऐश करते रहेंगे !

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देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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