अंतरराष्ट्रीय साहित्योत्सव उन्मेष में मालवी की मिठास बिखरी : बोलियां बचाना है तो बड़े मंचों पर ले जाना होगा-भोली बेन
इंदौर/पटना - एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय साहित्योत्सव 'उन्मेष' में अपने काव्य पाठ के माध्यम से मालवी की मिठास से सबको अवगत कराकर लौटी अपणो मालवो की संस्थापक एवं मालवी निमाड़ी साहित्य शोध संस्थान की सचिव हेमलता शर्मा भोली बेन ने बताया कि हमें यदि अपनी बोलियों, लोकभाषाओं को संरक्षित करना है, उन्हें बनाए रखना है तो उसे बोलचाल में लाकर साहित्य लिखा जाकर बड़े मंचों पर प्रस्तुत करना होगा तभी नई पीढ़ी का ध्यान इस ओर आकृष्ट होगा और बोलियां बची रहेगी। मालवी निमाड़ी अकादमी के लिए निरन्तर संघर्षरत भोली बेन ने केंद्रीय साहित्य अकादमी संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को साधुवाद ज्ञापित करते हुए पटना में हुए इस चार दिवसीय उन्मेष साहित्योत्सव को सार्थक और प्रशंसनीय बताया। 16 देशों, 100 भाषाओं और 500 से अधिक साहित्यकारों से सजा यह साहित्योत्सव अपने आप में अनूठा रहा। थाईलैंड और जापान से पधारे अतिथियों ने मालवी पगड़ी और वेश-भूषा को आकर्षक बताया जो निश्चय ही मालवा क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। ललदद्धस सभागार में जीवनानंद सत्र में रांची से पधारी कवित्रियों ने भी अपनी मातृभाषा में काव्य पाठ किया। गरिमामई उन्मेष का शुभारंभ बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने किया। इस अवसर पर साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ माधव कौशिक, उपाध्यक्ष प्रो.कुमुद शर्मा, संस्कृति मंत्रालय की अपर सचिव अमिता प्रसाद साराभाई एवं अनीश पी.राजन मौजूद रहे।
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