"दाढ़ी से बड़ी मूंछ" व्यंग्य संग्रह लोकार्पित
भोपाल । योग धर्म साधना केंद्र, भोपाल एवं भॊजपाल साहित्य संस्थान के तत्वावधान में श्री प्रियदर्शी खैरा के व्यंग्य संग्रह दाढ़ी से बड़ी मूछ का लोकार्पण श्री ऋषि कुमार शुक्ला,पूर्व डायरेक्टर सीबीआई की अध्यक्षता श्री एस एस लाल पूर्व पुलिस महानिदेशक के सारस्वत आथित्य में श्री मनोज श्रीवास्तव, मुख्य निर्वाचन आयुक्त मध्यप्रदेश के कर कमलों द्वारा स्वर्ण जयंती पार्क, भोपाल के योग चबूतरे पर प्रकृति के सुरम्य वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री आर एन मिश्रा, प्रख्यात ज्योतिर्विद, श्री सुरेश शर्मा, अध्यक्ष, नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट, इंडिया थे।
कार्यक्रम का प्रारंभ श्री राजेश श्रीवास्तव, अध्यक्ष योग धर्म साधना केंद्र, भोपाल के निर्देशन में सरस्वती वंदना से हुआ। बीज वक्तव्य श्री आरएमपी सिंह, पूर्व संचालक जनसंपर्क द्वारा प्रस्तुत किया गया। श्री सुदर्शन सोनी, कार्यकारी अध्यक्ष, भॊजपाल साहित्य संस्थान ने पुस्तक में संकलित व्यंग्यों पर विद्वता पूर्ण प्रकाश डाला। श्री प्रियदर्शी खैरा ने पुस्तक
में समाहित कुछ पंच लाइनों का उल्लेख किया एवं अपनी रचना प्रक्रिया साझा की।सारस्वत अतिथि श्री एस एस लाल ने कहा, व्यंग्य आनंद के लिए होता है विचार के लिए होता है और श्री खैरा के व्यंग्यों में आनंद स्पष्ट झलकता है।
मुख्य अतिथि श्री मनोज श्रीवास्तव ने अपने चिंतन युक्त उद्बोधन में कहा कि बेअदबी जब अदब का लिवास पहन कर आए तो व्यंग्य है। श्री खैरा अपने व्यंग्यों में बेअदबी बड़े अदब से करते हैं। इनके व्यंग्य के साथ-साथ हास्य भी है। उनकी पंच लाइन अद्भुत है। एक जगह वे राजनीतिकों पर कटाक्ष करते हुए लिखते हैं "इन्हें मातृभूमि से बड़ा प्यार होता है, तभी इनकी भूमि का रकबा हर साल बढ़ता रहता है।"अफसरों के बारे में कहते हैं,"चयन एवं पदोन्नति के समय इनका सामाजिक वर्ण देखा जाता है, इसके बाद ये अवर्णनीय हो जाते हैं।"
अध्यक्ष की आसंदी से बोलते हुए श्री ऋषि कुमार शुक्ला ने व्यंग्य को जीवन का एक आवश्यक तत्व बताया एवं एक अच्छे व्यंग्य संग्रह के लिए श्री खैरा को बधाई दी।श्री आर एन मिश्रा, ने अपने रोचक संचालन से श्रोताओं को बांधे रखा। आभार प्रदर्शन श्री राजेश श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यक्रम में श्री ब्रह्म प्रकाश पेठिया, पूर्व कुलपति, श्री विनोद श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार भी उपस्थित थे।
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