सरोकार साझा मंच की अक्टूबर माह की मासिक बैठक सम्पन्न
इंदौर । सरोकार साझा मंच की अक्टूबर माह की मासिक बैठक का आयोजन मंच की 12वीं सालगिरह के अवसर पर किया गया।आयोजक कृष्णा जोशी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभी का स्वागत किया। उपाध्यक्ष डॉ.अर्चना त्रिवेदी ने मंच के प्रकाशित संग्रहों की समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने अध्यक्ष महिमा शुक्ला और सचिव करुणा प्रजापति की कोशिशों का सम्मान करते हुए शुभकामनायें व्यक्त कीं।
सचिव करुणा प्रजापति ने गत वर्ष की सभी गतिविधियों और सदस्यों की उपलब्धियों से अवगत कराया।
' वर्तमान समय में उलझते- सुलझते वैवाहिक सम्बंध ' और युवा वर्ग- आदर्श विवाह के कितने दूर कितने पास? विषय पर उपस्थित रचनाकारों ने अपने विचार प्रस्तुत किये। भारतीय संस्कृति और परम्परा में विवाह के आदर्श और व्यावहारिक स्वरूप पर मुक़्त रूप से चर्चा हुईं। खास तौर पर लिव इन, तलाक और टूटते परिवारों पर चिंता व्यक़्त की गयी। पीढ़ी और समय के बदलाव के साथ विवाह सम्बन्धी धारणाएं टूट और बिखर रही हैं। पाश्चात्य सोच का प्रभाव युवा वर्ग को या तो विवाह विमुख कर रहा है या फिर उनमें अस्थायित्व बढ़ रहा है। शिक्षा - रोज़गार और व्यवसाय परिवारों में एकजुटता और प्रगतिशील बनाने के स्थान पर तनाव अधिक पैदा कर रहे हैं।आज हिंसा और शोषण ज्यादा हो रहे हैं। विवाह संबंधों में धैर्य और संतुलन दिखाई नहीं देता। अतः मानसिक उलझनें, अहंकार, असमानता और ग्रंथियां उत्पन्न हो रहीं है। जिनका प्रभाव परिवार और बच्चों पर पड़ता है। समाज और संस्कृति में इस समय जो गिरावट आ रही वह विवाह सम्बन्धी अपराध बढ़ा रही हैं। इससे बचाव जरूरी है। अपनी संस्कृति का पालन जीवन बनाने में हो न कि आडम्बर से जीने में।दोनों पक्ष नैतिक बल बढ़ा संबंध बचाये रखने में कोशिश करें। विवाह एक बंधन नहीं वरना सुरक्षा और जीवन जीने का सहज़ साधन है। जिसे निभाने में धैर्य, सहनशीलता,भरोसा और समझ बढ़ाई जाये। ऐसे अनेक मुद्दों को सामने लाया गया जो आज समाज को झकझोर रहे हैं।
इस चर्चा में माधुरी निगम, निरुपमा त्रिवेदी, मृदुला शर्मा वंदना शर्मा, रश्मि तिवारी,संगीता चौहान, अर्चना पंडित, जयश्री शर्मा निर्मला बागोरा और अमिता मराठे, कुहू सुरभि शुक्ला और डॉ विद्या पाराशर ने भाग लिया।
महिमा शुक्ला ने महिला उत्पीड़न और अपराधों के पीछे संकीर्ण पुरुषप्रधान सोच को जिम्मेदार बताया। इनसे बचाव के लिए सभी को पारिवारिक- सामाजिक अनुशासन और कानूनी प्रावधानों से अवगत रहना चाहिए । यह आत्मविश्वास,परस्पर समझ और जागरूकता के लिए जरूरी है।
मंच द्वारा प्रकाशित और अन्य पुस्तकें प्रदर्शित की गयीं। पहले पुस्तक प्रकाशन के लिए निरुपमा त्रिवेदी और अर्चना त्रिवेदी का सम्मान किया गया। समापन पर आयोजक शीला बडोदिया ने आभार प्रकट किया।
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