जिनशासन की प्रभावना में मंदिर निर्माण और जिनबिम्ब प्रतिष्ठा प्रमुख अंग हैं- मुनि सुव्रतसागर महाराज
वर्तमान तीस चौबीसी के मूलनायक भगवान शान्तिनाथ-कुंथुनाथ-अरनाथ स्वामी का किया प्रथम मस्तिकाभिषेक
ललितपुर। बुंदेलखंड के प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरि में परम पूज्य आचार्य प्रवर गुरुवर विद्यासागर महाराज एवं नवाचार समयसागर महाराज के मंगलमय आशीर्वाद से आयोजित श्रीमज्जिजिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा विश्व शांति महायज्ञ एवं नव गजरथ महा महोत्सव के समापन पर वात्सल्य मूर्ति मुनि सुव्रतसागर महाराज के पावन सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैया मुरैना, सह प्रतिष्ठाचार्य अमित जैन शास्त्री इंदौर के दिशा निर्देशन में रविवार को सुबह मूलनायक भगवान चमत्कारी बाबा पारसनाथ स्वामी का मस्तिकाभिषेक किया एवं नव निर्मित वर्तमान तीस चौबीसी के मूलनायक भगवान शान्तिनाथ-कुंथुनाथ-अरनाथ स्वामी का मस्तिकाभिषेक किया गया एवं छत्र चमर स्थापित किये गये। इस मौके पर मुनि सुव्रतसागर महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा जिनशासन की प्रभावना में मंदिर निर्माण और जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महत्वपूर्ण अंग हैं। पावागिरि में अब भक्तों को मूलनायक भगवान के साथ 9 फुट ऊँची उत्तंग प्रतिमाओं के दर्शन और अभिषेक शांतिधारा करने का सौभाग्य मिलेगा। कार्यक्रम में पारस भैया, पं. विनोद कुमार शास्त्री, डॉ. जयकुमार, राजकुमार चकरपुर, अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना, मंत्री जयकुमार जैन कन्धारी, कोषाध्यक्ष उत्तमचंद जैन बबीना, उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा, दीपक सिंघई, जितेंद्र जैन, अनिल कुमार, रवि जैन, सचिन जैन, तिलक जैन, अचिन जैन ईलू, गौरव विरधा, शुभम मोदी, अक्षत पवा सहित क्षेत्र प्रबंध कार्यकारिणी समिति, निकटवर्ती एवं देश के कोने - कोने से पधारे सकल दिगम्बर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। संचालन अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन बबीना ने किया। आभार व्यक्त महामंत्री जयकुमार जैन कन्धारी एवं उपाध्यक्ष विशाल जैन पवा ने संयुक्त रूप से किया।
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