नगरपालिका का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन: 'आनंद उत्सव' के तहत कवियों ने जगाई देशप्रेम की अलख, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा शहर
इटारसी। मध्य प्रदेश शासन के 'आनंद उत्सव' की मूल भावना— 'प्रसन्नता और सामूहिकता' को चरितार्थ करते हुए इटारसी के जयस्तंभ चौक पर गणतंत्र की शाम एक यादगार उत्सव में बदल गई। नगरपालिका परिषद द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने न केवल साहित्य की खुशबू बिखेरी, बल्कि कड़ाके की ठंड में भी शहरवासियों के मन को राष्ट्रवाद और उत्साह के 'आनंद' से भर दिया।
समारोह का शुभारंभ नपाध्यक्ष पंकज चौरे, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा जिला अध्यक्ष जयकिशोर चौधरी, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष राहुल चौरे, कांग्रेस नगर अध्यक्ष कन्हैया गोस्वामी,सभापति राकेश जाधव ,मंजीत कलोसिया, पार्षद
राहुल प्रधान, दिलीप गोस्वामी, अमित विश्वास, कुंदन गौर, शुभम् गौर, कार्यालय अधीक्षक राजेंद्र शर्मा और वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद पगारे ने दीप प्रज्वलन कर किया।
वीर रस की ललकार: "माटी का तिलक करो, ये वीरों की कहानी है"
मंच पर जब वीर रस के दिग्गज कमलेश राजहंस (सोनभद्र) ने अपनी ओजस्वी वाणी में राष्ट्र के शौर्य का बखान किया, तो श्रोताओं में देशप्रेम का उफान आ गया। बरेली से आए गौरीशंकर धाकड़ और बैतूल के पुष्पक देशमुख ने जब सीमाओं पर डटे प्रहरियों की वीरता को छंदों में पिरोया, तो समूचा वातावरण 'भारत माता की जय' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। यह केवल कविता नहीं, बल्कि शब्द-रूपी ज्वाला थी जिसने हर युवा के रक्त में उबाल ला दिया।
हास्य-व्यंग्य और गीतों से मिला 'आनंद'
* मुस्कुराहटों का उत्सव: शाजापुर के अशोक नागर और टिमरनी के मुकेश शांडिल्य 'चिराग' ने हास्य-व्यंग्य के ऐसे बाण छोड़े कि आनंद उत्सव का उद्देश्य सफल हो गया। पूरा चौक ठहाकों से सराबोर रहा।
* गीत और ग़ज़ल: नागपुर की सरिता सरोज और राजगढ़ के कन्हैया राज ने गीतों की मधुरता से माहौल को माधुर्य और संवेदना प्रदान की।
* सूत्रधार: इटारसी के अपने ब्रजकिशोर पटेल ने अपनी चपल शैली और हास्य-व्यंग्य के तड़के से मंच का संचालन कर समां बांध दिया।
नपाध्यक्ष का संबोधन: तनाव मुक्त समाज और गौरवशाली राष्ट्र
नपाध्यक्ष पंकज चौरे ने कहा कि "मध्य प्रदेश शासन का आनंद उत्सव हमें तनाव भूलकर एक साथ खुशियाँ मनाने का अवसर देता है। गणतंत्र दिवस पर यह काव्य संध्या हमारे गौरवशाली इतिहास और भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी को याद दिलाने का एक सशक्त माध्यम है।"
प्रमुख उपस्थिति
इस साहित्यिक महाकुंभ में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, जनप्रतिनिधि और साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिन्होंने देर रात तक कवियों का उत्साहवर्धन किया।
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