काव्य :
नव वर्ष 2026पर,
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हर मन,अधर सदा पुलकित हो..
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इंजी. अरुण कुमार जैन
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सारा देश धुंधलके में है, वायुप्रदूषण भारी है,
दम घुटता है,साँसे बोझिल,
हर गरीब दुखियारी है.
कार, बसें, कन्टेनर भिड़ते,
असमय डस लेती है मौत,
फ्लाइट कैंसिल,परेशान सब, ठप्प पड़े सारे उद्योग.
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बांग्लादेश में अत्याचार है, मानवता पल पल रोती,
पाक,युक्रेन, बलूचिस्तान में, बिलख रहे बेटे बेटी,
ऐसे मेंअभिनन्दन किसका,
कैसे नव वर्ष मनाएं हम??
हर प्राणी सुख, शांति पाये,
कैसे जतन कराएं हम.?
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हर उषा में अरुणोदय है,
धुंधला है.. यह काफ़ी है,
हर रात्रिशशि कीशीतलता,
धैर्य बंधाती माँ भी है.
उड़ते पक्षी,बहती सरिता,
पवन सुरभि आशा देती,
हरी धरा यह, खेत में फसलें,
कल सुखमय,घोषित करती.
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करें प्रार्थना प्रभु से पलपल
सदपथ पर सब जन आयें,
श्रम, निष्ठा उत्साह साथ लें
ऊर्जा, मन आनंद पाएं.
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बढ़ें लक्ष्य तक,हर पल संग संग,
सदा सफलता सब पाएं,
हर विपदा को पार करें सब, दिव्य स्वास्थ्य जन जन पाएं.
छटें धुंधलके तमस, वैर के,
नेहलोक बिखर जाये,
हर मन,अधर,सदा पुलकित हो,
नया वर्ष ऐसा आये.
================संपर्क//अमृता हॉस्पिटल, सेक्टर 88,फ़रीदाबाद, हरियाणा.
मो//7999469175
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