काव्य :
नीलकंठ कहलाये प्रभु.....
- इंजी. अरुण कुमार जैन
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अनुराग, साधना, करुणा, श्रद्धा, सेवा हर मन लाता.
शिवशक्ति को कोटि नमन यह शिव रात्रि कहलाता.
जगपालक के आँगन देवी
माँ पार्वती जी आयीं,
सारी सृष्टी नंदन कानन,
जड़, चेतन खुशियाँ लायीं.
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शिवनन्दन, जग के मंगल को,सबकी पीर मिटेगी,
सेवा,करुणा, मैत्री,मुदिता
नवयुग सृजन करेगी.
निराकार बन प्रगटे इस दिन, हर कण तृण में भक्ति,
शिवलिंग सृष्टी के निर्माता
हर मन श्रद्धा, भक्ति.
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सारे जग की पीर मिटाने,
सहज़ रहे बिष पीकर,
नीलकंठ कहलाये प्रभु जी
कीर्तमान नव रचकर.
इस वसुधा के जड़ चेतन को, नेह, प्रेम, करुणा दी,
हर वंचित,पीड़ित,निर्बल को, चरणों में शरणा दी.
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अर्चन, नर्तन,भक्ति, साधना,संयम,सेवा इस दिन,
कंकर से शंकर बनने का,
हर स्वर्णिम अवसर इस दिन.
कोटि नमन, माँ जगत पिता को,'शिवशक्ति' जो युग में,
हर शंका का समाधान हो,
इस दिन इन चरणों में.
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संपर्क//अमृता हॉस्पिटल, सेक्टर 88/फ़रीदाबाद, हरियाणा.
मो. 7999469175
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