लघु कथा :
तनाव
आजकल जहां भी देखो एक ही चर्चा चारों ओर है, चाहे गली...., मोहल्ले....., न्यूज़ चैनल......, समाचार पत्र...., सोशल मीडिया हो या फिर चौराहों पर आम आदमी की चर्चा.. एक ही बात चल रही है कि चारों ओर ठगी का माहौल है, ठग घूम रहे हैं.. यहां तक की बैंकों खातों की रकम भी गायब कर रहे हैं।
आज सुबह ही न्यूज़ में सुना कि.... लोगों की गाढ़ी कमाई के हजारों- लाखों रुपए की जमा पूंजी खातों से अचानक बिना किसी सुराग के उड़ा ली गई..! यह सुनकर मन मस्तिष्क में भयंकर तनाव हो गया और बिना कुछ सोचे समझे मन में तमाम आशंकाएं लिए मैंने हड़बड़ा कर अपनी पुरानी स्कूटर उठाई और बैंक पहुंच गया... जल्दी-जल्दी एटीएम कार्ड डाला.... पासवर्ड डाला.... और.. बैलेंस चेक किया । इस पर बड़ी तसल्ली की सांस ली कि मेरे 10,000 रुपए सलामत थे।
खुश होकर भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए सोच रहा था कि जीवन में कितनी समस्याएं हैं ? ज्यादा समाचार देखने-सुनने से कितना तनाव हो जाता है.... मन ही मन कसम खाकर सोच रहा था कि अब मैं इन फालतू में, इन समाचारों के झंझटों में नहीं पड़ूंगा ... बहुत टेंशन होता है....इन सभी से । इसी उहापोह में बैंक से बाहर निकल कर मन में तमाम उल्टे-सीधे विचार लिए आगे बढ़ कर देखा तो तनाव और ज्यादा बढ़ गया मेरे 10,000 रुपए तो बच गए थे लेकिन वर्षो की मेरी प्रिय स्कूटर को अब मैं गंवा चुका था.....मेरे पास रह गई उसकी यादें और चाबी बस۔۔۔۔!
- मन मोहन भटनागर,
झांसी (उत्तर प्रदेश).
.jpg)

आंखें बंद कर लेने से आसन्न ख़तरा टल नहीं जाता या अपने वर्तमान से निर्भिज्ञ लोगों की यही नियति होती है। बड़े गूढ़ अर्थ छिपे हैं कहानी में। बहुत ख़ूब, सर।
ReplyDelete