काव्य :
आया है ऋतु राज!
आओ प्रिय परदेश से,
आया है ऋतु राज!
मौन निमंत्रण पुहुप का,
मधुप नाचता आज!!
मधुप नाचता आज ,
आम भी बौराया है!
चले सुगंध बयार,
नशा मन पर छाया है!
कहे गुप्त कवि राय,
मुझे ना और सताओ!!
आया मधुर बसंत,
लौट तुम भी घर आओ!!
- सुरेश गुप्त ग्वालियरी
विंध्य नगर बैढ़न
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