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लघु कहानी : पसीने की कीमत - विवेक रंजन श्रीवास्तव , भोपाल


 

लघु कहानी :

पसीने की कीमत

 - विवेक रंजन श्रीवास्तव , भोपाल

        गगनचुंबी इमारतों को रस्सों की सीढ़ी पर लटककर, अपनी जान की बाजी लगाकर , चमकाने वाला रामू आज खुद भीतर तक धुंधला गया था। कड़ी धूप में , मेहनत करते उसकी पीठ, कमान हो चुकी थी। ठेकेदार पिछले दो महीनों से मजदूरी नहीं दे रहा था। बूढ़ी माँ की दवा खत्म थी और छोटे के स्कूल की फीस बाकी।

जब वह अपनी शिकायत लेकर मजदूर कल्याण के सरकारी दफ्तर पहुँचा, तो सुरक्षाकर्मी ने उसे दरवाजे पर ही रोक दिया। 

भीतर साहब एयरकंडीशनर में 'मजदूर कल्याण' की फाइल निपटा रहे थे। 

रामू की आँखों में बेबस आंसू थे, पर निर्मम व्यवस्था अंधी थी । घर लौटते हुए उसने सड़क किनारे नेता जी के फोटो के साथ लगे बड़े से होर्डिंग पर पढ़ा उन्नत राष्ट्र, सुखी मजदूर ।

उसने अपनी फटी हुई चप्पल ठीक की और बढ़ गया । व्यवस्था के पन्नों पर  सुंदर फोटो थे, पर रामू की बेबसी गुम थी।

 - विवेक रंजन श्रीवास्तव भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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