संस्कार भारती रांची महानगर की साधारण सभा की बैठक संपन्न : कलमकारों और कलाकारों ने मातृशक्ति का किया गुणगान
रांची । संस्कार भारती रांची महानगर द्वारा आयोजित साधारण सभा का आयोजन सांस्कृतिक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अपराह्न 2:30 बजे मुख्य अतिथि विजय भूषण द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। आगंतुक सदस्यों का स्वागत मंगल तिलक एवं अंगवस्त्र से किया गया। कार्यक्रम का स्वागत अभिभाषण रांची महानगर के उपाध्यक्ष आशुतोष प्रसाद ने दी।
सभा में सुश्री सुजाता मजूमदार एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत ध्येय गीत ने वातावरण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। वहीं सरस्वती वंदना की मधुर प्रस्तुति ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की। इसके पश्चात मुख्य अतिथि विजय भूषण को अंगवस्त्र देकर सम्मान किया गया।
महामंत्री शशिकला पौराणिक ने संगठन का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए वर्ष भर की गतिविधियों, उपलब्धियों की जानकारी दी। कोषाध्यक्ष अनूप कुमार मजूमदार ने आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि विजय भूषण ने अपने संबोधन में भारतीय कला, साहित्य और संस्कारों के संरक्षण में संस्कार भारती की भूमिका की सराहना करते हुए इसे समाज की सांस्कृतिक चेतना का सशक्त मंच बताया। अध्यक्षीय उद्बोधन में रांची महानगर अध्यक्ष रामानुज पाठक ने संगठन की रचनात्मक सक्रियता को और व्यापक बनाने का आह्वान किया। सभा का प्रमुख आकर्षण माँ दिवस की संवेदनशील थीम पर आधारित काव्य गोष्ठी रही। जिसमें कवियों और कवयित्रियों ने मातृत्व, नारी अस्मिता और पारिवारिक संवेदनाओं को प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति दी।
डॉ. सुरिंदर कौर नीलम ने अपनी मार्मिक पंक्तियों —
“सूरज से भी पहले उठकर, धूप की सांकल खोले माँ,
रिश्ते तो अब सौदेबाजी, ममता कभी न तोले माँ”— से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
अरुणाभूषण ने “माँ तेरे सपने सच हो जाए” की कामना व्यक्त की, जबकि ऋतुराज वर्षा ने सासु माँ की पीड़ा और ममता को संवेदनशील शब्दों में उकेरा।
रेनू बाला धार ने नारी आरक्षण के प्रश्न पर तीखा स्वर देते हुए कहा —
“नारी के आरक्षण पर जाने क्यों खलबली हुई,
आज भी हर हाल में नारी ही छली गई।”
ग्रामीण जीवन की स्मृतियों को स्वर देते हुए रेणु झा ‘रेणुका’ ने भोजपुरी संवेदना से परिपूर्ण पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं —
“बाबा दहलीजे, कदम की गाछ,
ताहि तरे अम्मा बिछावें नित खाट।”
जवाहरलाल ने माँ को रिश्तों की संपूर्णता बताते हुए कहा —
“माँ मन के संदूक में आकांक्षाओं की तह भर देती है,
माँ अकेली ही हर रिश्ते की जगह भर देती है।”
अमरेश कुमार ने भावुक स्वर में कहा —
“माँ बिना अधूरा जीवन है,
इतना ही मैं कहता उनसे, माँ है तो जीवन है।”
राकेश रमन की पंक्तियाँ —
“अब आज जब माँ नहीं है,
मेरे मुँह से जब-तब निकलता है — अइया गे मइया”
— ने श्रोताओं की आँखें नम कर दीं।
उपाध्यक्ष आशुतोष प्रसाद ने माँ की महिमा का वर्णन करते हुए कहा —
“माँ केवल एक शब्द नहीं, जीवन का सम्मान है,
धरती पर ईश्वर का सबसे सुंदर रूप माँ है।”
संगीत प्रस्तुति में डॉ. सुजाता मजूमदार ने माँ के विविध रूपों पर आधारित मधुर गीत प्रस्तुत किया। अवनींद्र सिंह द्वारा कविवर निराला की प्रसिद्ध रचना “वीणा वादिनी वर दे” की भावपूर्ण प्रस्तुति हुई।
जे. पी. सिंह ने भी अपने गीतों से वातावरण को संगीतमय बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में महामंत्री शशिकला पौराणिक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर गुर कमल सिंह जगदेव, अमरेश कुमार, जयप्रकाश सिंह, राकेश रमन, जेपी श्रीवास्तव, लल्लन राय, ऋतुराज वर्षा, रेनू झा ‘रेणुका’, रेनू बाला धार
कुमकुम गौड़, रीना सहाय, विजय खोवाला, अंजलि जैन, दीपमाला, डॉ. सुरिंदर कौर नीलम, जवाहरलाल, अवनींद्र सिंह, शिवपूजन पाठक, सुजाता मजूमदार, अनूप कुमार सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे।
अंत में सामूहिक वंदे मातरम् गायन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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