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काव्य : चल मुसाफ़िर - श्रीमती अंजना दिलीप दास , बसना, महासमुंद


 काव्य :

 चल मुसाफ़िर


चल मुसाफ़िर, चल मुसाफ़िर,  

शून्यता से शिखर की ओर।  

जी-जान लगा दे पूरी,  

मेहनत का पसीना बहा दे भरपूर।  

देख बस अब अपनी मंज़िल की ओर,  

चल मुसाफ़िर, चल मुसाफ़िर,  

शून्यता से शिखर की ओर…।  


कदम जो डगमगाएँगे,  

गिरकर फिर संभल जाएँगे।  

हौसलों की उड़ान भरकर,  

एक दिन गगन को छू आएँगे।  

लगा दे अपना पूरा ज़ोर,  

चल मुसाफ़िर, चल मुसाफ़िर,  

शून्यता से शिखर की ओर…।  


राहों में शूल भी आएँगे,  

रक्तरंजित पग हो जाएँगे।  

फिर भी बढ़ते रहना निरंतर,  

हर कदम सफलता के चिह्न बनाएँगे।  

तेरी उड़ान मचाएगी जग में शोर,  

चल मुसाफ़िर, चल मुसाफ़िर,  

शून्यता से शिखर की ओर…।  


ऊँचा पद और नाम मिलेगा,  

हर ओर सम्मान मिलेगा।  

आलस त्याग, समय का मूल्य पहचान,  

कड़ा परिश्रम अपार सुख लाएगा।  

भाग्य भी थामेगा तेरी डोर,  

चल मुसाफ़िर, चल मुसाफ़िर,  

शून्यता से शिखर की ओर…।  


- श्रीमती अंजना दिलीप दास  

बसना, महासमुंद (छ.ग.)

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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