ad

अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की दिल्ली इकाई ने डॉ. सुधा कुमारी की पुस्तक पर मंथन किया


 

अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की दिल्ली इकाई ने डॉ. सुधा कुमारी की पुस्तक पर मंथन किया

दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की दिल्ली इकाई  की नई पहल ‘पुस्तक मंथन’ के अंतर्गत 6 जून को अनलाइन कार्यक्रम में  डॉ. सुधा कुमारी की सद्यः प्रकाशित और चर्चित महत्वपूर्ण पुस्तक "टुवर्ड्स एन ईगेलिटेरियन सोसायटी" की बहुत विस्तार से चर्चा हुई। 

मंच संस्थापिका डॉ. संतोष श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण में पुस्तक समीक्षा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने तथा ऊंचे स्तर तक ले जाने की बात की। 

वक्ताओं में.......

 *अंग्रेजी की विद्वान् नीलम दुग्गल ने पुस्तक को आज के समय में और समसामयिक बताते हुए कथ्य की बहुत सूक्ष्मता से समीक्षा की, जैसे- विश्व के सभी भागों में संघर्षों को समाप्त करना, जातियों में समन्वय, स्त्री-पुरुष का शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, न्यायिक प्रणाली में सरल भाषा, संक्षिप्त और सटीक अपील और आदेश, समय पर न्याय, ‘फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट’, जेंडर क्राइम का समाधान, विवाह की संस्था में सुधार, किशोर अवस्था में परिवार द्वारा मार्गदर्शन, महिलाओं का संपत्ति का अधिकार आदि। मीडिया, बिजनेस हाउसेस,  विशिष्ट व्यक्ति एवं अन्य सभी अपनी सोच को बदलें तो हम एक खुशहाल समाज का निर्माण कर सकते हैं। 

*डॉ० प्रशांत रोकड़े, अपर आयुक्त जीएसटी ने सूचना की बजाय ज्ञान परम्परा पर ध्यान देने पर जोर दिया और पुस्तक में जातिवाद, असमानता आदि पर सुधार को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसा संपूर्ण संतुलित समाज व्यवहार में असंभव है। 

*वंदना रानी दयाल ने कहा समतामूलक समाज ‘यूटोपिया’ (काल्पनिक स्थान) लगता है, पर कोशिशें ज़ारी रहनी चाहिए। यदि आकाश तक पहुंचना है तो सितारों का लक्ष्य रखना होगा। कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका अपने स्तर पर कार्य करेगी पर समतामूलक समाज व विश्व का सपना साकार करने के लिये हर एक नागरिक उत्तरदायी है। उन्होंने इस पुस्तक को एक ‘ह्वाइट पेपर’ बताया जो वातावरण, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, विधिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक विषयों पर समस्या के साथ समाधान और अधिकार के साथ उत्तरदायित्व की भी चर्चा करती है।  

सेवानिवृत्त जज संतोष खन्ना ने भी अपने विचार व्यक्त किये और कहा कि पालन-पोषण के समय ही बच्चों को संस्कारित करना आवश्यक है।

 डॉ. दुर्गा सिन्हा ‘उदार’ ने अध्यक्षयीय भाषण में “आय अर्जित करने और उत्पादन जैसी सकारात्मक क्रियाओं पर टैक्स और दण्ड तो कचरा, प्रदूषण और अतिक्रमण जैसी नकारात्मक क्रियाओं पर टैक्स और दण्ड क्यों नहीं?” को रेखांकित किया। उन्होंने  महर्षि अरविंद की घोषणा “21 वीं सदी मातृ सदी होगी” और नोबल पुरस्कार विजेता डॉ० सीवी रमन के कथन “महिलाओं को शिक्षा न देना सही नहीं और विज्ञान की शिक्षा न देना विज्ञान की क्षति है” को याद किया कि आज महिला हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, शिक्षित हुई है किन्तु समाज में अभी भी दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता है।

डॉ. शुभ्रा ने कुशल मंच संचालन किया। 

लेखिका डॉ. सुधा कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन में बताया कि पुस्तक समग्र जीवन के अनुभव समेटकर धरती की शान्ति, विकास और समन्वय के लिए लिखी गयी है ताकि दूसरे ग्रह पर जीवन की खोज से पहले हम धरती को निवास योग्य शांतिपूर्ण रहने दें। मनुष्य ईश्वर की दी हुई चमत्कारिक क्षमता- ऊर्जा, संकल्प, अदम्य साहस, बुद्धि, कल्पनाशक्ति और महत्वाकांक्षा- से अंतरिक्ष में सौरमंडल को पार कर सकता है तो सद्भावपूर्ण समाज भी अवश्य बना सकता है।  

इस चर्चा में करीब चालीस लोगों ने शिरकत की। इस कार्यक्रम का संयोजन अर्चना पाडंया ने की।

 - अर्चना पाडंया

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post