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व्यंग्य :वायरस पुराण - मनमोहन चौरे भोपाल


व्यंग्य :

वायरस पुराण
   
     बचपन से हमने धार्मिकता में बनारस, हास्य में काकाजी का हाथरस और खाने में स्वादिष्ट  आमरस का ही नाम सुना था।थोड़ी समझ बड़ी, तो नौ रसों का रसास्वादन किया। सारे रसों का अनुभव भी किया क्योंकि रस दुनिया में ऐसे ही विद्यमान हैं जैसे वायु सब जगह है।
          साहित्य में व्यंग्य के साथ हास्य रस के दर्शन हुए, तो चुनाव में नेताजी के टिकट कटने पर या चुनाव हार जाने पर कभी करुण रस, तो कभी रौद्र रस के। खादी के कलफ लगे कुर्ते की बात हो या कुर्सी के प्रति प्रेम,प्रायः श्रंगार रस की याद दिलाते हैं। तो सेवानिवृत्ति की आयु बीत जाने के पश्चात भी राजनीति को नहीं छोड़ पाना, अद्भुत रस का एक बहुत ही प्रासंगिक उदाहरण है।राजनीति के गिरते स्तर को देख कर अद्भुत रस का नजारा दिखा।सांप्रदायिक दंगों में वीभत्स रस तो कहीं अवैध घुसपैठियों के लिए उमड़ते प्रेम में वात्सल्य रस नजर आया।
          जब हम सब इन नवरस में डूबे हुए थे, तभी दसवें रस का प्रादुर्भाव हुआ, जो वायरस के नाम से कुख्यात हुआ। इस रस ने हमारी जिंदगी में उथलपुथल मचा दी। इसने अद्भुत रस, करुण रस, वीभत्स रस सबके एक साथ दर्शन करा दिये तो हास्य रस, श्रंगार रस जैसे पृथ्वी लोक से गायब ही हो गये। पूरे विश्व में केवल यमराज का ही राज चल रहा था। 
          पहले लगा था वायरस का काम सिर्फ बीमारियाँ फैलाना है जिससे डेंगू, मलेरिया, चिकन गुनिया आदि होते हैं। फिर ससुरा धीरे से हमारे मोबाइल में घुस गया। पुरानी यादों को सहेजने वाले सारे फोटो,वीडियो, संपर्क नंबर एक झटके में गायब हो गये। लेकिन क्या करें, उसे हमारा मोबाइल इतना भा गया कि वह बाहर निकलने को तैयार ही नहीं था।वह जिद्दी था तो हम भी कुछ कम नहीं।दोनों ही मैदान में डट गये। इस द्वंद्व में वायरस को मोबाइल से बाहर निकालने का खर्च इतना हो गया, जितने में एक नया मोबाइल आराम से खरीदा जा सकता था। 
          मेरे मोबाइल जैसे कई मोबाइल का डाटा खाकर वह वायरस बहुत तंदुरुस्ती और होसले के साथ अपने काम पर लग गया। जैसे सफल चोरी के बाद चोर बड़ा हाथ मारने का सोचता है, वैसे ही वायरस अब मोबाइल छोड़ कर बड़े बड़े कम्प्यूटर,सर्वरआदि पर भाग्य आजमाकर सारी दुनिया को परेशान करने लगा।
         वायरस की कारगुजारियों को देखते हुए समय आ गया है कि विद्वानों के द्वारा वायरस पुराण लिखने का कार्य प्रारम्भ किया जाये,ताकि इसके दुष्प्रभावों, दुष्परिणामों की जानकारी आम जनों तक पहुँच सके एवं वे इससे सतर्क एवं सावधान रहें। 

- मनमोहन चौरे 
भोपाल 
मो.9893361341
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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