लेखिका संघ के तत्वावधान में बरेली में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया
बरेली । महानगर की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था लेखिका संघ के तत्वावधान में बरेली में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता संस्था की संरक्षक श्रीमती निर्मला सिँह ने की तथा मुख्य अतिथि रहे राजेश गौड़ एवं विशिष्ट अतिथि कवि इंद्र देव त्रिवेदी रहे।रहे। कवि गोष्ठी का शुभारम्भ गीतकार कमल सक्सेना द्वारा माँ शारदे की वंदना से किया गया।
निर्मला सिँह ज़ी ने अपनी कविता इस तरह पढ़ी,,, एक बिस्तरबंद है लड़की जिसकी उम्र के साथ साथ रजाई, तकिया, गद्दा व चादर रख दी जाती है जिससे माहौल मार्मिक हो गया।
राजेश गौड़ ने राम मंदिर पर गीत पढ़ते हुए कहा कि,,, रामजी के घर में सेंध मारी हो गयी. सरे आम आस्था की चोरी हो गयी।
कमल सक्सेना ने अपनी ग़ज़ल कुछ ऐसे पढ़ी,,,
ज़िन्दगी साज है ये साज बजाते रहिये। गीत जो रोज सुनाते हो सुनाते रहिये। नाव ले जायेगी इक रोज किनारे पे कमल, शर्त इतनी है कि पतवार चलाते रहिये। जिस पर सभी ने तालियां बजायीं।
इंद्रदेव त्रिवेदी ने अपना गीत पढ़ते हुए कहा कि,,,कैसे पहचाने कौन असली कौन नकली है जिसे सभी ने पसंद किया।
अंशु गुप्ता ने कहा कि,, कुण्डी, दरवाजे,,सांकल ड्योढी,फिर कैसे मर्यादा तोड़ी। तेरा, आज सजाने को मैंने मैंने अपनी धूप है छोडी।
मीरा प्रियदार्शनी ने सावन का स्वागत इस तरह से किया,, सावन हमसे यही कहता, प्रेम सभी से बांटा करो। जीवन चाहे जैसा भी हो हर पल हँसकर काटा करो।
सचिव डॉ किरण कैंथवाल ने वर्षा ऋतु पर कविता पढ़ते हुए कहा कि,, भीनी भीनी खुशबु आती मौसम ये बेताब है। वर्षा ऋतु का आया मौसम हरियाली का सबाब है।गोष्ठी की आयोजक शैलजा भारद्वाज ने अपनी ग़ज़ल इस तरह से पढ़ी,,
इतनी जल्दी ना करो जाने की।
सांस रुक जायेगी दीवाने की। जिसे सभी ने खूब पसंद किया।
संस्था अध्यक्ष दीप्ती पांडे नूतन ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि,, हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई से ऊपर हम सब को उठाना होगा। आर्थिक रूप से जो है. कमजोर उनकी ताकत बनना होगा।
उमा शर्मा ने अपनी कविता कुछ ऐसे पढ़ी,,,, कलम उठाई तो दिल की आवाज़ लिखती हूँ। तन्हाई और दर्द की एक दास्तान लिखती हूँ।
अनुराग त्यागी ने जिम्मेदारी पर अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि,,, सबको निभानी होंगी अपनी अपनी जिम्मेदारी। कर्मों से पूरी करनी होंगी अपनी भागीदारी।
शायर अविनाश अग्रवाल ने अपनी ग़ज़ल ऐसे पढ़ी मुझको गले लगाते तो कुछ और बात होती। वीरान करके घर को मस्जिद को किया रोशन, घर के दिये जलाते तो कुछ और बात होती। मीना अगवाल ने अपनी ग़ज़ल कुछ ऐसे पढ़ी,,, तेरी मेरी मोहब्बत में है फर्क सिर्फ इतना, मै ज़िन्दगी का हिस्सा हूँ तू ज़िन्दगी है मेरी। डॉ अखिलेश गुप्ता ने माँ पर कविता पढ़ते हुए कहा कि,,, मां
*मां तृप्ति का सागर है,*
*मां प्रीत की गागर है।*
*मां पुण्य प्रभाकर है,*
*मां सत्य दिवाकर है।।*
गिरिजा भारती ने अपना गीत पढ़ते हुए कहा कि,,
कठिन संघर्ष का सफर अभी बाकी है, प्यारा सपनों का भारत बनाओ। इसके अतिरिक्त मीरा मोहन ने भी वर्षा ऋतु पर दोहे सुनाये।कवि गोष्ठी का सफल संचालन संस्था की अध्यक्ष दीप्ती पांडे नूतन ने किया। शैलजा भारद्वाज ने सभी का आभार व्यक्त किया और सबको भोजन के लिये आमंत्रित किया।
- कमल सक्सेना कवि गीतकार बरेली
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