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लघुकथा : वही गलती - डॉ अंजना गर्ग ( सेवानिवृत) म द वि रोहतक


 लघुकथा :

 वही गलती 

“पापा, आप मेरी और रोहित की शादी क्यों नहीं होने दे रहे? आपने भी तो लव मैरिज की थी!”
काव्य लगभग रो पड़ी।

पिता कुछ देर चुप रहे। फिर मुस्कुराए—
“हाँ बेटा, की थी… और उसी का रिज़ल्ट तुम रोज देखती आई हो।”

काव्य चौंकी।

“तुम्हारी मम्मी बहुत सुंदर थीं। मैं उनकी सुंदरता पर मर मिटा था। लगा था, बस प्यार हो तो जिंदगी जन्नत बन जाती है। लेकिन शादी के बाद पता चला कि हमारे विचार, हमारी आदतें, हमारी महत्वाकांक्षाएँ— सब अलग थीं। मैं छोटे शहर में शांत जीवन चाहता था, तुम्हारी मम्मी को बड़े शहर की चमक चाहिए थी।”

उन्होंने गहरी साँस ली।

“धीरे-धीरे प्यार पीछे छूट गया और समझौते आगे आ गए। फिर बहसें, शिकायतें, दूरी… और आखिर में एक ही घर में दो अजनबी।”

काव्य खामोश थी।

“मैं तुम्हें प्यार करने से नहीं रोक रहा, बेटा। बस यह चाहता हूँ कि तुम चेहरे से आगे इंसान को भी पहचानो। एक दूसरे को समझो।”

 - डॉ अंजना गर्ग ( सेवानिवृत)
   म द वि रोहतक
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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