काव्य :
हमें भारतवर्ष का परचम विश्व में लहराना है
।।विधा।। गीत ।।
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हमें भारतवर्ष का परचम विश्व में लहराना है।
भारत वर्ष को विश्व गुरु विश्व बंधु कहलाना है।।
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संपूर्ण विश्व देख रहा है उम्मीद से भारत की ओर।
भारत से शांति संदेश पहुंच रहा विश्व के ओर-छोर।।
राष्ट्र की हर सीमा पर शान से हमें तिरंगा फहराना है।
हमें भारतवर्ष का परचम विश्व में लहराना है।।
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भगत आजाद बोस गांधी हजारों नाम जुड़े आजादी से।
आज हम बहुत ही सक्षम बचा सकते हैं हर बर्बादी से।।
तलवार की चमक शांति गीत एक साथ गुनगुनाना है।
हमें भारतवर्ष का परचम विश्व में लहराना है।
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बुद्ध कृष्ण और राम का अपना महान भारत देश है।
एकता की नींव पर खड़ा हुआ विविध भाषा--वेश है।।
शत्रु से रहने को सतर्क हमें आंख भी नहीं झपकाना है।
हमें भारतवर्ष का परचम विश्व में लहराना है।।
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हम बांस का तीर भी और साथ बांसुरी भी बना रहे हैं।
आर्थिक मोर्चे पर भी अब हम विश्व में बढ़ते जा रहे हैं।।
हमें भारत को फिर सोने की चिड़िया वाला कहलाना है।
हमें भारतवर्ष का परचम विश्व में लहराना है।।
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- एस के कपूर "श्री हंस" , बरेली
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