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काव्य : सर्प -शोभा शर्मा, छतरपुर, म.प्र.


काव्य : 

 सर्प

सर्प होता है चमकीला प्यारा सा,
पर विष भरी पोटली से जाना जाता है।
अजगर होता है कितना सुंदर,
लेकिन अपनी हिंसक निगलने वाली,
प्रकृति से जाना जाता है।

कुछ सर्प होते हैं विषहीन,
पर अपने विषैले साथियों के कारण,
मारे जाते हैं।
एक मछली,
जैसे सारे तालाब को गंदा करती है।
वैसे ही एक करैत के कारण,
सारे सर्प फन कुचले जाते हैं।

पर नहीं किया जाता ऐसा इंसानों में!
एक विषवमन करे तो
सारे इंसानों को संक्रमण लग जाता है।
सारे इंसान करने लग जाते हैं विष वमन,
मुसकुराते, ठठाते, व्यंग्य बाण छोड़ते हुए,
चुगलखोरी, झूठ और काईंयापन दिखाते हुए,
जो नाग नहीं करते हैं।

मनुष्य से नाग फिर भी अच्छे हैं,
क्योंकि विष पोटली उन्हें प्रकृति ने दी है,
वे बनाए गए हैं प्रकृति द्वारा,
पर नहीं दी है प्रकृति ने मानव को,
झूठ, चुगलखोरी, काईयांपन,
बेईमानी की पोटली,
यह पोटली इंसानों ने,
अपने आनंद की खातिर,
खुद ही ईज़ाद की है।
इस विष का असर तेजी से चढ़ता है,
कुछ मुठ्ठी भर अच्छे इंसानों पर,
पावन मन, पवित्र दयालु मन वालों पर,
मौत हो जाती है फिर उनकी,
विषैले मानवों के दंश से 
तड़पते हुए प्राण त्याग देते हैं।

नागों और इंसानों में कितनी समानता है।
हम नाग की पूजा करते हैं!
पर उनसे ज्यादा विष उगलते हैं।
प्रतियोगिता में जीतना हमारा,
प्रथम कर्तव्य जो है।।

 - शोभा शर्मा, छतरपुर, म.प्र.

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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