काव्य :
कलम स्वयं कमाल है
मन में आये विचारों को
कागज़ पर उतारती है कलम
गीत,कविता,छन्द,चौपाई
और पूजा की आरती है कलम
मौन को मुखर करती
भाषा,और देती अर्थ
होती सक्षम और समर्थ
व्याकरण सँवारती है कलम
आंदोलन है,मंथन है
इतिहास दर्ज क़रती है
विवश नहीं,कभी रही
विभिन्न रूप धारती है कलम
वेदना है,संवेदना है
अभिव्यक्ति है,विचार है
वियोग ,संयोग व्यक्त करती
शब्द बन निहारती है कलम
शिक्षा का माध्यम है
मानव संस्कृति का विकास है
परतंत्र,स्वतन्त्र देश का इतिहास ये
देश भक्ति गीत बन पुकारती है कलम
कलम ,मित्र है कागज की
है मित्र,लेखक कवियों की
साहित्य,ज्ञान ,विज्ञान है
बंधक नहीं ये,दहाड़ती है कलम
कलम स्वयं कमाल है
भाषा ,बोली की ढाल है
युद्ध,पराक्रम की ललकार बनती
*ब्रज*,शहीदों पर स्वयं को वारती है कलम
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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