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काव्य : मिले कहां अब वो यार - डॉ. सत्यवान सौरभ,भिवानी


 काव्य : 

मिले कहां अब वो यार

(मित्रता दिवस विशेष)


दोस्त बने सब काम के, करें काम से प्यार।

बैठ सुदामा सोचता, मिले कहां अब वो यार।।


फ्रेंडलिस्ट में है जुड़े, सबके दोस्त हजार।

मगर पड़ोसी से नहीं, रहा तनिक भी प्यार।।


मित्र मिले हर राह पर, मिला नहीं बस प्यार।

फैंक चले सब बाँचकर, ज्यों पढ़कर अखबार।।


नई सदी में आ रहा, ये कैसा बदलाव।

संगी- साथी दे रहें, दिल को गहरे घाव।।


हुए कहां कब दोगले, सौरभ किस के मित्र।

कांधे औरों के चढ़े, खींचें खुद के चित्र।।


सुख में लगता है सदा, सबका सही चरित्र।

दुख में ही परखे मनुज,  सौरभ सच्चा मित्र।।


सच्चे दोस्त का कभी, होता नहीं विकल्प।

मंजिल पाने का सदा, देता जो संकल्प।।


-डॉ. सत्यवान सौरभ,भिवानी

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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