सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था का नया कीर्तिमान : 'साहित्यकार को जानें' साहित्यिक शृंखला के 50 एपिसोड सफलतापूर्वक संपन्न
हैदराबाद। साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा और समाज सेवा हेतु समर्पित अग्रणी राष्ट्रीय संस्था- 'सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, हैदराबाद, भारत' की संस्थापिका सरिता सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार संस्था द्वारा संचालित ऑनलाइन परिचर्चा शृंखला- 'साहित्यकार को जानें' को आरम्भ करने का उद्देश्य हमारे पूर्ववर्ती साहित्यकारों की जयन्ती पर उनके साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करना है। साथ ही साथ कार्यक्रम में सहभागी विद्वान साहित्यकारों द्वारा उनके समग्र रचना-संसार पर दिए गए व्याख्यान और परिसंवाद के माध्यम से जो नवनीत निकल कर आता है, उसे ग्रहण करना भी है।
यह शृंखला हमने विक्रम संवत् 2080, ज्येष्ठ शुक्ला पूर्णिमा, 4 जून 2023 को संत कबीर दास जी की जयन्ती से आरम्भ की थी। इस शृंखला के अन्तर्गत हम संत कबीर दास जी, श्री केदारनाथ अग्रवाल जी, डॉ. कुँअर बेचैन जी, श्री चंद्रधर शर्मा गुलेरी जी, डॉ. गोपालदास नीरज जी, डॉ.नामवर सिंह जी, मुंशी प्रेमचन्द जी, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी, सुभद्रा कुमारी चौहान जी, गोस्वामी तुलसीदास जी, महाकवि श्री कन्हैयालाल जी सेठिया, राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर जी, डॉ हरिवंशराय बच्चन जी, बालकृष्ण शर्मा नवीन जी और अटल बिहारी वाजपेयी जी, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी, डॉ. धर्मवीर भारती जी, संगीतकार नौशाद अली जी, श्री जैनेन्द्र कुमार जी, श्री जयशंकर प्रसाद जी, श्री सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी, श्री रामनरेश त्रिपाठी जी, श्री फणीश्वर नाथ रेणु जी, श्री सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी, महीयसी महादेवी वर्मा जी, पण्डित माखनलाल चतुर्वेदी जी, महावीर प्रसाद द्विवेदी जी, सुमित्रानंदन पंत जी, शरद जोशी जी, जनकवि बाबा नागार्जुन जी, गोपाल सिंह नेपाली जी, प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री हरिशंकर परसाई जी, हिन्दी साहित्य के पितामह श्री भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी, प्रसिद्ध गज़लकार अदम गोंडवी जी और आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी की जयन्ती पर परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
इनमें सबसे अनूठा कार्यक्रम रहा, शताब्दी के सहयात्री रचनाकार श्री रामदरश मिश्र जी के 102 वें जन्म दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित परिसंवाद कार्यक्रम।
यह पहला अवसर था, जब हमारे बीच उपस्थित 101 वर्षीय वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय श्री रामदरश मिश्र जी के समग्र रचना-संसार पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.ओम निश्चल जी और डॉ. स्मिता मिश्र जी ने उनके बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। इस अभूतपूर्व कार्यक्रम से जुड़े समस्त सुधि साहित्यकारों ने इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की और इस साहित्यिक शृंखला के निर्बाध जारी रहने के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की। शृंखला की इसी कड़ी में 50 वां परिसंवाद कार्यक्रम राजस्थानी और हिन्दी भाषा के लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकार श्री कन्हैयालाल जी सेठिया के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित था। आगे भी यह शृंखला अनवरत जारी रहेगी।
इस शृंखला में देश-विदेश से जिन लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकारों ने अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराया और चर्चित साहित्यकारों के रचना-संसार पर अपनी बात रखी, उनमें प्रमुख हैं - डॉ. हरीश नवल, डॉ.स्नेह सुधा नवल, डॉ. सूर्यबाला, श्री सुभाष चंदर, श्री प्रगीत कुँअर, डॉ. भावना कुँअर, आचार्य संजीव वर्मा सलिल, डॉ. विनय विक्रम सिंह, श्री राजेश्वर वशिष्ठ, श्री लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, बी.एल.आच्छा, अन्नदा पाटनी, अमेरिका, डॉ.रत्नेश्वर सिंह, डॉ.शुभदा पाण्डेय, कुसुम सिंह अविचल, डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंघवी, डॉ.निर्मला शर्मा, डॉ. शुभदा वांजपे, डॉ.ऋषभदेव शर्मा, डॉ.गोपाल शर्मा, डॉ.सुमनलता, डॉ.मीरा भारती, डॉ.सविता स्याल, सुभाष सिंह, आशा पाण्डे ओझा, डॉ.माणिक्यांबा मणि, श्री संजय भारद्वाज, प्रो. अंजनी कुमार द्विवेदी, समीक्षा तैलंग, डॉ.ओम निश्चल, डॉ. स्मिता मिश्र, श्री जयप्रकाश सेठिया, श्रीमती रचना सरन, श्री रमेश कुण्डलिया, श्री भालचंद चौरड़िया, श्री सुरेश चौधरी, श्री जयप्रकाश शर्मा, श्रीमती सुनीता लुल्ला, श्री राजेन्द्र गट्टानी, डॉ.दमयन्ती शर्मा, मिलन प्रभात गुंजन, डॉ.सरोज सिंह परिहार, नरेंद्र सिंह नीहार, श्रीमती शकुन्तला मित्तल, डॉ.अमरेंद्र वर्मा, यशपाल सिंह यश और श्री नीरव नागोरी। इन सभी के प्रति संस्था अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करती है।
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समाचार प्रकाशित करने हेतु हार्दिक आभार आदरणीय भाई साहब
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