काव्य :
होली
हो ली सो होली अब तक
आज तो प्रेम करो सबको,
जली होलिका स्वयं ही में
प्रल्हादी जीवन दो सबको।
एक रंग में रँगे जो दोनों
राधा श्याम बना दो सबको,
प्रेम रंग में सब रँग जाएँ
नफ़रत से उबार दो सबको।
स्वागत नये अन्न का करके
भूख विहीन कर दो सबको,
क्या बच्चा, क्या बूढ़ा जवां
खुशियाों से भर दो सबको।
जात धर्म भाषाई दुराव
होली में जला दो सबको,
हिल मिल खेलो होली तब
प्रेम रंग में डुबा दो सबको।
यह होली का त्यौहार
भारत का संदेश हो सबको
ऐसे खेलो होली मित्रों
चकित करा दो जगको।
- डॉ.सत्येंद्र सिंह
पुणे, महाराष्ट्र
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सत्येंद्र सिंह जी, होली प्रेम, सदभावना को बढ़ावा देने वाला पर्व है, सुंदर संदेश दिया है। हार्दिक बधाई और युवा प्रवर्तक से जुड़े सभी भाई-बहनों को, संपादक श्री. देवेंद्र भाई सोनी जी को होली पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं!
ReplyDeleteल. जाधव, पुणे