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काव्य : पगडंडी और सड़क - डॉ सत्येंद्र सिंह , पुणे महाराष्ट्र


 

काव्य : 

पगडंडी और सड़क 


पगडंडी को सड़क 

बनते देखा है,

सड़क को पगडंडी भी 

बनते देखा है।


जिस दिन कोई महान

गुजरा था 

पगडंडी 

सड़क बन गई थी।

लेकिन,

उसके गुजर जाने के बाद 

दिन पर दिन 

सड़क सिमटती गई 

और

फिर पगडंडी बन गई।


जब आमजन

पग पग चलते हैं 

तब बनती है पगडंडी 

और सड़क 

बड़े लोगों के 

चलने से बनती है।

फिर,

प्रगति की निशानी 

बन जाती है।

                -    डॉ सत्येंद्र सिंह 

                    पुणे महाराष्ट्र

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

1 Comments

  1. सत्येंद्र सिंह जी,
    बहुत मार्मिक रचना। पगडंडी और सड़क वर्तमान की सच्चाई है। हार्दिक बधाई🎉🎊

    लतिका

    ReplyDelete
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